Ramadan 2026 Special Namaz : तरावीह और अन्य विशेष नमाजों का महत्व और तरीका जानें
रमजान का पवित्र महीना इबादत और आत्म-चिंतन का समय है. इस लेख में रमजान के दौरान पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज 'तरावीह' के महत्व, रकात और अन्य महत्वपूर्ण दुआओं की जानकारी दी गई है.
इस्लाम धर्म में रमजान का महीना केवल रोजा रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रातों को जागकर अल्लाह की इबादत करने का भी समय है. 19 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस पाक महीने में पांच वक्त की अनिवार्य नमाज के अलावा कुछ विशेष नमाजें पढ़ी जाती हैं, जिन्हें 'नफिल' और 'सुन्नत' इबादत माना जाता है. इनमें सबसे प्रमुख 'तरावीह' की नमाज है, जो केवल रमजान के महीने में ही अदा की जाती है.
तरावीह की नमाज: रूहानी सुकून का जरिया
तरावीह की नमाज ईशा (रात की नमाज) के बाद और वित्र से पहले पढ़ी जाती है. 'तरावीह' शब्द अरबी के 'तरवीहा' से बना है जिसका अर्थ है 'आराम करना'. चूंकि यह नमाज लंबी होती है, इसलिए हर चार रकात के बाद कुछ देर बैठने या आराम करने की परंपरा है.
ज्यादातर मस्जिदों में तरावीह में कुरान का पाठ (तिलावत) किया जाता है. सुन्नत के अनुसार इसे 8 या 20 रकात पढ़ा जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति ईमान और सवाब की नियत से तरावीह पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते हैं.
रमजान की नफिल नमाज
मुस्लिम समाज के लोग रमजान में नफिल नामज़ भी अदा करते हैं. नफिल नमाज रात में भी पढ़ी जा सकती है.
तहज्जुद और शब-ए-कद्र की रातें
रमजान की रातों में 'तहज्जुद' की नमाज का भी विशेष स्थान है. यह नमाज आधी रात के बाद और सहरी से पहले पढ़ी जाती है. हालांकि यह पूरे साल पढ़ी जा सकती है, लेकिन रमजान में इसका सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है.
विशेष रूप से रमजान के आखिरी 10 दिनों की विषम रातों (21, 23, 25, 27, 29) में 'शब-ए-कद्र' की तलाश की जाती है. इन रातों में जागकर नमाज पढ़ना हजार महीनों की इबादत से बेहतर माना गया है.
सामुदायिक एकता और अनुशासन
रमजान की ये विशेष नमाजें न केवल आध्यात्मिक लाभ देती हैं, बल्कि सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देती हैं. जब लोग मस्जिदों में कंधे से कंधा मिलाकर तरावीह पढ़ते हैं, तो इससे भाईचारे की भावना मजबूत होती है. साथ ही, घंटों तक खड़े रहकर नमाज पढ़ना धैर्य और अनुशासन का पाठ भी सिखाता है.