Nowruz 2026 Wishes: पारसी नववर्ष 'नवरोज' के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
दुनिया भर में पारसी और ईरानी समुदाय के लोग 'नवरोज' के साथ नए साल का जश्न धूमधाम से मनाते हैं. वसंत विषुव के साथ शुरू होने वाला यह त्योहार नई शुरुआत, शुद्धता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है. ऐसे में पारसी नववर्ष नवरोज के इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Nowruz 2026 Wishes in Hindi: दुनिया भर में लगभग 300 मिलियन लोग 20 मार्च 2026 को पारसी नववर्ष यानी 'नवरोज' (Nowruz) का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं. प्राचीन पारसी धर्म (Zoroastrianism) से जुड़ी यह परंपरा 3,000 साल से भी अधिक पुरानी है, जो ईरानी कैलेंडर के पहले दिन और वसंत विषुव (Vernal Equinox) के साथ शुरू होती है. यह पर्व न केवल ईरान, अज़रबैजान और मध्य एशिया में प्रमुखता से मनाया जाता है, बल्कि भारत सहित दुनिया भर के पारसी, कुर्द और तुर्किक समुदायों के लिए सांस्कृतिक पहचान का एक बड़ा हिस्सा है.
'नवरोज' दो फारसी शब्दों 'नव' (नया) और 'रोज' (दिन) से मिलकर बना है. यह त्योहार 13 दिनों तक चलता है और प्रकृति के पुनर्जन्म, उर्वरता और नई शुरुआत के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करता है. भारत में पारसी समुदाय साल में दो बार नया साल मनाता है. वैश्विक स्तर पर समुदाय के लोग 20 या 21 मार्च को 'जमशेदी नवरोज' मनाते हैं, वहीं भारत में 'शहंशाही कैलेंडर' का पालन करने वाले लोग अगस्त के महीने में भी एक नया साल सेलिब्रेट करते हैं.
दुनिया भर में पारसी और ईरानी समुदाय के लोग 'नवरोज' के साथ नए साल का जश्न धूमधाम से मनाते हैं. वसंत विषुव के साथ शुरू होने वाला यह त्योहार नई शुरुआत, शुद्धता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है. ऐसे में पारसी नववर्ष नवरोज के इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए शुभकामनाएं दे सकते हैं.
नवरोज की तैयारी घरों की गहन साफ-सफाई के साथ शुरू होती है. पारसी समुदाय में मान्यता है कि नए साल की शुरुआत से पहले घर को पूरी तरह स्वच्छ करना अतीत की नकारात्मकता को दूर करने और आने वाले वर्ष के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करने का प्रतीक है. इस अवसर पर लोग नए वस्त्र पहनते हैं और दिन की शुरुआत 'अग्यारी' (अग्नि मंदिर) जाकर विशेष प्रार्थनाओं और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ करते हैं.
इतिहासकारों के अनुसार, 7वीं शताब्दी में जब पारसी समुदाय के लोग भारत आए, तो उन्होंने अपनी समृद्ध परंपराओं और रीति-रिवाजों को सहेज कर रखा. नवरोज का पर्व इसी साझा सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, जहां लोग आपसी भाईचारे और कृतज्ञता के साथ एक-दूसरे से मिलते हैं. इस दिन घरों को रंगोली और फूलों से सजाया जाता है और विशेष पारसी व्यंजन तैयार किए जाते हैं.