Nag Panchami 2025 Wishes: नाग पंचमी पर इन शानदार हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings को भेजकर दें शुभकामनाएं
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. इसके साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. यह पर्व नागों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा का प्रतीक है. इस अति पावन अवसर पर आप इन शानदार विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को भेजकर अपनों को नाग पंचमी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Nag Panchami 2025 Wishes in Hindi: भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के अतिप्रिय सावन महीने (Sawan Maas) को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है, क्योंकि इस पूरे महीने न सिर्फ भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि इस महीने कई तीज-त्योहार भी मनाए जाते हैं. इन त्योहारों में से एक है नाग पंचमी (Nag Panchami) का पर्व, जो नाग देवता को समर्पित है. इस पर्व को हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस साल नाग पंचमी 29 जुलाई 2025 को मनाई जा रही है. नाग पंचमी के दिन देशभर के तमाम शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है और भक्त महादेव के साथ-साथ नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करते हैं. इसके साथ उन्हें दूध का भोग अर्पित करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इससे नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. इसके साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. यह पर्व नागों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा का प्रतीक है. इस अति पावन अवसर पर आप इन शानदार विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को भेजकर अपनों को नाग पंचमी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर घर के पूजा स्थल पर नाग देवता की प्रतिमा स्थापित करें. अगर प्रतिमा न हो तो आटे से सांप बनाकर भी पूजा की जा सकती है. अब नाग देवता को दूध, जल, हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई इत्यादि अर्पित करके धूप-दीप प्रज्जवलित करें. 'ॐ नागदेवाय नमः' या 'ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नागः प्रचोदयात्' मंत्र का जप करें. पूजन के दौरान नाग पंचमी की कथा सुनें या पढ़ें और आखिर में आरती उतारकर अपनी पूजा संपन्न करें.