Merry Christmas in Advance 2025 Wishes: क्रिसमस की एडवांस में शुभकामनाएं देने के लिए शेयर करें ये हिंदी Quotes, WhatsApp Messages और Facebook Greetings
साल के सबसे आखिरी पर्व क्रिसमस को छुट्टियों के मौसम की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है, क्योंकि क्रिसमस की पूर्व संध्या से लेकर नए साल के आगमन तक हर कोई जश्न में सराबोर नजर आता है. यहां तक कि क्रिसमस से पहले ही बधाइयों का सिलसिला शुरु हो जाता है. ऐसे में आप भी मेरी क्रिसमस इन एडवांस कहने के लिए अपनों के साथ इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर कर सकते हैं.
Merry Christmas in Advance 2025 Wishes: क्रिसमस (Christmas) दुनिया भर में मनाया जाने वाला साल का अंतिम और सबसे बड़ा पर्व है, जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह नजर आता है और लोग इसकी तैयारियों में कई दिन पहले से जुट जाते हैं. दरअसल, पांच दिवसीय दिवाली उत्सव (Diwali Festival) के बाद से क्रिसमस की तैयारियां शुरु हो जाती हैं. क्रिसमस के पर्व को दुनियाभर के कई देशों में 25 दिसंबर को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. क्रिसमस के पर्व को ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. ईसाई धर्म की प्रचलित मान्यतों के अनुसार, पूरी दुनिया को दया और प्रेम का संदेश देने वाले प्रभु यीशु का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए इस दिन को हर कोई यादगार बनाने की कोशिश करता है. इस पर्व को मनाने के लिए लोग अपने घरों में क्रिसमस ट्री लाते हैं, इसके साथ पूरे घर को रंग-बिरंगी लाइटों और मोमबत्तियों से रोशन किया जाता है. इस दिन लोग सैंटा बनकर अपनों को गिफ्ट देते हैं, साथ ही शानदार दावतों का आयोजन किया जाता है.
साल के सबसे आखिरी पर्व क्रिसमस को छुट्टियों के मौसम की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है, क्योंकि क्रिसमस की पूर्व संध्या से लेकर नए साल के आगमन तक हर कोई जश्न में सराबोर नजर आता है. यहां तक कि क्रिसमस से पहले ही बधाइयों का सिलसिला शुरु हो जाता है. ऐसे में आप भी मेरी क्रिसमस इन एडवांस कहने के लिए अपनों के साथ इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर कर सकते हैं.





ईसाई मान्यताओं के अनुसार, क्रिसमस शब्द की उत्पत्ति क्राइस्ट से हुई है, जिसे पहली बार 336 ई. में रोम में सेलिब्रेट किया गया था. इसी दिन ईसा मसीह ने मरीयम के यहां जन्म लिया था और उनके जन्म की भविष्यवाणी मरीयम को सपने में सुनाई दी थी. ऐसी मान्यता है कि गर्भावस्था के दौरान मरीयम ने बेथलहम की यात्रा की थी. यात्रा के दौरान रात के समय उन्हें पशु पालन करने वाले गड़रिए की गुफा में आश्रय लेना पड़ा था और अगले दिन उसी गुफा में प्रभु यीशु का जन्म हुआ था, इसलिए उनके जन्मदिन की खुशी में सदियों से 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाने की परंपरा चली आ रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 23, 2025 02:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

