Magh Mela 2026: प्रयागराज में संगम की नगरी में 3 जनवरी से माघ मेले की धूम, जानें पवित्र स्नान की तिथियां और अन्य सभी डिटेल्स

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी प्रयागराज में विश्व प्रसिद्ध 'माघ मेला 2026' का आगाज 3 जनवरी से होने जा रहा है. पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रथम मुख्य स्नान के साथ ही संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा. लगभग 45 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और कल्पवासी शामिल होंगे

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Magh Mela 2026: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी प्रयागराज में विश्व प्रसिद्ध 'माघ मेला 2026' का आगाज 3 जनवरी से होने जा रहा है. पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रथम मुख्य स्नान के साथ ही संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा. लगभग 45 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और कल्पवासी शामिल होंगे. प्रशासन ने मेले क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित कर सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजाम किए हैं.

माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियों का विवरण

इस वर्ष माघ मेले के दौरान कुल छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे. श्रद्धालु इन तिथियों पर पवित्र त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) में डुबकी लगाएंगे. यह भी पढ़े: Mahakumbh 2025: महाकुंभ स्नान के दौरान गंगा में डुबकी लगाना कितना सुरक्षित? CPCB ने संगम में फेकल बैक्टीरिया के स्तर में वृद्धि के दिए संकेत, NGT ने जताई चिंता

  1. प्रथम स्नान (पौष पूर्णिमा): 3 जनवरी 2026 (मेले का विधिवत आरंभ और कल्पवास की शुरुआत)

  2. द्वितीय स्नान (मकर संक्रांति): 14 जनवरी 2026

  3. तृतीय स्नान (मौनी अमावस्या): 18 जनवरी 2026 (सबसे बड़ा स्नान पर्व)

  4. चतुर्थ स्नान (बसंत पंचमी): 23 जनवरी 2026

  5. पंचम स्नान (माघी पूर्णिमा): 1 फरवरी 2026

  6. षष्ठ स्नान (महाशिवरात्रि): 15 फरवरी 2026 (मेले का औपचारिक समापन)

अन्य डिटेल्स

माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'कल्पवास' है, जो 3 जनवरी से शुरू होकर 1 फरवरी (माघी पूर्णिमा) तक चलेगा. इसमें श्रद्धालु एक महीने तक संगम तट पर झोपड़ियों में रहकर न्यूनतम संसाधनों के साथ जीवन व्यतीत करते हैं. कल्पवासी दिन में तीन बार स्नान करते हैं और केवल एक समय फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि कल्पवास करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है.

प्रशासन की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था

मेला प्राधिकरण ने इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए घाटों की लंबाई बढ़ाई है. जल पुलिस, गोताखोरों और सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है.

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश

प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु केवल निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें और गहरे पानी में न जाएं. सर्दी के मौसम को देखते हुए बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही, मेले को स्वच्छ रखने के लिए प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है.

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