Lal Bahadur Shastri Jayanti 2025 Quotes in Hindi: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुगलसराय में हुआ था, इसलिए हर साल 2 अक्टूबर को शास्त्री जयंती (Shastri Jayanti) मनाई जाती है. अपनी साफ-सुथरी छवि और सादगी के लिए प्रसिद्ध शास्त्री जी ने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया था. वह करीब 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश के दूसरे प्रधानमंत्री होते हुए उनके पास न तो खुद का घर था और न ही कोई संपत्ति थी. उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. सिर्फ 16 साल की उम्र में शास्त्री जी (Shastri Ji) आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे. देश के स्वाधीनता संग्राम में शामिल होने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए. आंदोलन में शामिल होने की वजह से उन्हें 17 साल की उम्र में पहली बार जेल भेज दिया गया था, लेकिन नाबालिग होने की वजह से उन्हें आजाद कर दिया गया.
बतौर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का कार्यकाल बेहद छोटा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने सरल स्वभाव और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर कई मिसालें कायम कीं. उन्होंने मुश्किल समय में देश की सत्ता संभाली थी और चुनौतियों का डटकर सामना किया. लाल बहादुर शास्त्री का जीवन लोगों के लिए एक आदर्श है और उनके संघर्षों से लोगों को प्रेरणा भी मिलती है. शास्त्री जयंती के इस खास अवसर पर आप उनके इन 10 अनमोल विचारों को अपनों संग शेयर कर सकते हैं.










ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री पद की कमान संभालने के बाद 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई. भारत-पाक युद्ध के दौरान भयंकर सूखे के चलते शास्त्री जी ने देशवासियों से एक दिन उपवास रखने की अपील की थी और उनके नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. इसके बाद ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई थी.
खबरों की मानें तो शास्त्री जी की सेहत बिल्कुल ठीक थी, लेकिन उनकी मौत की वजह हार्ट अटैक को बताया गया था. हालांकि जब उनके पार्थिव शरीर को भारत लाया गया तो प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उनके शरीर पर घाव के निशान थे. इसके बाद उनकी संदिग्ध मौत की जांच के लिए राज नारायण जांच समिति का गठन किया गया था, लेकिन आज तक उनकी मौत के रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है.













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