Kabir Das Jayanti 2024 Wishes: कबीर दास जयंती के इन शानदार हिंदी Quotes, Dohas, WhatsApp Messages, GIF Greetings को भेजकर दें शुभकामनाएं
कबीर दास की रचनाओं का प्रमुख भाग सिख गुरु और गुरु अर्जन देव के द्वारा एकत्र किया गया था. उनकी रचनाओं को सिख धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित किया गया है. इस साल संत गुरु कबीर दास जी की 674वीं जयंती मनाई जा रही है. ऐसे में इस खास अवसर पर आप इन शानदार हिंदी विशेज, कोट्स, दोहे, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को भेजकर अपनों को कबीर दास जयंती की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Kabir Das Jayanti 2024 Wishes in Hindi: ‘ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए.‘ इस दोहे को सुनते ही जहन में संत कबीर दास की छवि उभर आती है. विख्यात कवि संत कबीर दास (Sant Kabir Das Jayanti) ने अपने जीवन काल में न जाने कितने ही दोहे और रचनाओं से लोगों को प्रेरित करने का कार्य किया. कवि, लेखक और समाज सुधारक संत गुरु कबीर दास जी (Sant Guru Kabir Das) की जयंती हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, इस साल 22 जून 2024 को कबीर दास जयंती मनाई जा रही है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) स्थित काशी के समकक्ष लहरतारा ताल में सन 1398 में हुआ था. उनके जन्म को लेकर ऐसी मान्यता है कि रामानंद गुरु के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से उनका जन्म हुआ था, लेकिन समाज के डर से महिला ने उन्हें काशी के लहरतारा में छोड़ दिया था, जिसके बाद उनकी परवरिश निसंतान नीरू और नीमा नाम के दपंत्ति ने की. वहीं कुछ विद्वानों का मानना है कि कबीर दास जन्म से ही मुस्लिम थे और गुरु रामानंद से उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी.
कबीर दास की रचनाओं का प्रमुख भाग सिख गुरु और गुरु अर्जन देव के द्वारा एकत्र किया गया था. उनकी रचनाओं को सिख धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित किया गया है. इस साल संत गुरु कबीर दास जी की 674वीं जयंती मनाई जा रही है. ऐसे में इस खास अवसर पर आप इन शानदार हिंदी विशेज, कोट्स, दोहे, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को भेजकर अपनों को कबीर दास जयंती की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





संत कबीर दास ने अपने दोहों के जरिए लोगों के मन में व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया और धर्म के कट्टरपंथ पर प्रहार किया. उनके जीवन काल में समाज में कई तरह के अंधविश्वास फैले हुए थे, जिसमें से एक अंधविश्वास यह था कि काशी में जिसकी मृत्यु होती है उसे स्वर्ग प्राप्त होता है, जबकि मगहर में मृत्यु होने पर नरक यातना झेलनी पड़ती है. कबीर दास जी अपने जीवन के अंतिम समय में मगहर चले गए, जहां उनकी मृत्यु हुई.
उनके अनुयायियों में हर धर्म के लोग शामिल थे, इसलिए उनकी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों में विवाद होने लगा. कहा जाता है कि इस विवाद के बीच जब शव से चादर हटाई गई तो वहां सिर्फ फूल थे, जिन्हें दोनों धर्मों के लोगों ने आपस में बांट लिया और अपने धर्म के हिसाब से अंतिम संस्कार किया.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 21, 2024 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

