Sikar Road Protest: राजस्थान (Rajsthan News) के सीकर जिले में इन दिनों एक अनोखा आंदोलन देखने को मिल रहा है. यहां ग्रामीणों ने सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर लेटकर (Sikar Protest) अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि पहले धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए जो सड़क बनाई गई थी, अब उसमें बदलाव कर दिया गया है. इसके खिलाफ ग्रामीणों ने "चिपको आंदोलन (Chipko Aandolan)" जैसा तरीका अपनाते हुए सड़कों पर लेटकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़-धोद धार्मिक कॉरिडोर (Laxmangarh-Dhod Corridor) के तहत बनने वाली 75 किलोमीटर लंबी एमडीआर 415 सड़क का मामला इस आंदोलन की वजह है.
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सड़क के लिए 'चिपको आंदोलन'
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— Shivaji Mishra | शिवाजी मिश्रा (@08febShivaji) August 26, 2025
धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप
एक साल पहले यह सड़क बठोठ, सांवलोदा पुरोहितान, चुड़ौली, फागलवा, जीण माता समेत कई अन्य गांवों के धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली थी. लेकिन हाल ही में राज्य सरकार (Rajsthan Government) ने इसका मार्ग बदल दिया. ग्रामीणों का कहना है कि इस बदलाव से उनकी धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है.
पूर्व पंचायत समिति सदस्य नरेंद्र बत्रा का कहना है कि पहले की योजना में इस सड़क से कई महत्वपूर्ण मंदिर और स्मारक जुड़े थे. जैसे बठोठ का लोठजी जाट स्मारक, चुड़ौली का बालाजी मंदिर और हरिराम बाबा मंदिर. लेकिन अब सरकार ने इन स्थलों की अनदेखी की है. इससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया है. उनका आरोप है कि सरकार ने ग्रामीणों की राय लिए बिना ही फैसला बदल दिया.
ग्रामीणों ने प्रशासन से जाहिर की नाराजगी
ग्रामीणों ने कई बैठकों और सभाओं के माध्यम से प्रशासन के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि धार्मिक स्थलों और शहीद स्मारकों को जोड़ने वाला यह मार्ग उनके लिए आस्था का विषय है. इसके बावजूद उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया. अब लोग सड़कों पर उतर आए हैं और "हमारी सड़क वापस दो" के नारे लगा रहे हैं.
आंदोलनकारियों का कहना है कि सांवलोदा पुरोहितान और बठोठ के बीच से गुजरने वाला पुराना मार्ग कई बड़े धार्मिक स्थलों और स्मारकों को जोड़ता है. एक तरफ यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-52 से जुड़ता है, तो दूसरी तरफ कई शहीद स्मारकों और मंदिरों तक जाता है. इसके अलावा, यह मार्ग फागलवा और जाजोद जैसे राज्य राजमार्गों से भी जुड़ता है.
मांगे पूरी न होने पर बड़े आंदोलन को चेतावनी
ग्रामीणों का गुस्सा इतना बढ़ गया है कि उनका कहना है कि अगर सरकार उनकी बात नहीं मानती है, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे. लोगों का कहना है कि वे इस सड़क को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. किसानों ने तो यहां तक कह दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे जेली और दांतली (खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार) भी उठा लेंगे.
फिलहाल, यह आंदोलन तेजी से फैल रहा है और हर दिन इसमें और लोग जुड़ रहे हैं. ग्रामीणों का साफ कहना है कि इतने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले मार्ग को बदलना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है.













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