Retail Digital Rupee: क्या है आरबीआई का रिटेल डिजिटल रुपया? जानें इसके मुख्य फीचर्स, काम करने का तरीका और UPI से अंतर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'रिटेल डिजिटल रुपया' (e₹) देश की आधिकारिक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) है. यह भौतिक नकदी (कैश) का डिजिटल रूप है, जो बिना किसी बैंक खाते के सीधे केंद्रीय बैंक के लेजर पर काम करता है. जानें इसके काम करने का तरीका और यह यूपीआई से कैसे अलग है.

भारतीय रिजर्व बैंक (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 19 मई: भारत में डिजिटल वित्तीय तंत्र (Digital Financial Ecosystem) को मजबूत करने और नकदी के उपयोग को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) यानी आरबीआई (RBI) द्वारा शुरू की गई सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency) (CBDC) यानी 'रिटेल डिजिटल रुपया' (e₹) तेजी से चर्चा में है. यह डिजिटल रुपया (Digital Rupee) आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए रोजमर्रा के लेन-देन को आसान बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है. यह पूरी तरह से आरबीआई द्वारा समर्थित और जारी किया गया संप्रभु (Sovereign) डिजिटल टोकन है, जिसे भारतीय नोटों और सिक्कों के समान ही कानूनी निविदा (Legal Tender) का दर्जा प्राप्त है. यह भी पढ़ें: साइबर फ्रॉड पर वार: गृह मंत्रालय और RBI की संस्था के बीच समझौता, AI से होगी 'म्यूल अकाउंट्स' की पहचान

क्या है रिटेल डिजिटल रुपया (e₹)?

रिटेल डिजिटल रुपया कोई बैंक डिपॉजिट या डिजिटल वॉलेट बैलेंस नहीं है, बल्कि यह सीधे केंद्रीय बैंक की देनदारी (Liability) है. इसका मूल्य भौतिक भारतीय रुपये के बिल्कुल बराबर (1:1 के अनुपात में) होता है.

आरबीआई इसे ठीक उसी संप्रदाय या मूल्यवर्ग (Denominations) में जारी करता है जिसमें हमारे भौतिक नोट और सिक्के आते हैं—जैसे ₹10, ₹50, ₹100, ₹500 आदि. चूंकि यह पूरी तरह से भौतिक नकदी की तरह काम करता है, इसलिए आपके डिजिटल रुपया वॉलेट में रखी गई राशि पर पारंपरिक बैंक खातों की तरह कोई ब्याज (Zero Interest) नहीं मिलता है.

यह कैसे काम करता है?

रिटेल डिजिटल रुपये का उपयोग करने के लिए उपभोक्ताओं को आरबीआई द्वारा अधिकृत बैंकों द्वारा प्रदान किया जाने वाला एक समर्पित 'ई-रुपया एप्लिकेशन' (e-Rupee App) डाउनलोड करना होता है. इसके बाद, उपभोक्ता अपने बैंक खाते से पैसे को डिजिटल टोकन में बदलकर इस सुरक्षित वॉलेट में स्टोर कर सकते हैं.

इस ऐप के जरिए व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) के बीच सीधे लेन-देन किया जा सकता है. दुकानों पर भुगतान करने के लिए उपभोक्ता वहां मौजूद मानक क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके आसानी से डिजिटल टोकन ट्रांसफर कर सकते हैं.

रिटेल डिजिटल रुपये के मुख्य फीचर्स

आरबीआई की इस डिजिटल कैश प्रणाली में कई अनूठी विशेषताएं शामिल हैं जो इसे मौजूदा प्रणालियों से अलग बनाती हैं:

डिजिटल रुपया बनाम यूपीआई बनाम क्रिप्टोकरेंसी

आम जनता अक्सर डिजिटल रुपये को यूपीआई (UPI) या क्रिप्टोकरेंसी के समान समझने की भूल कर देती है, जबकि तकनीकी रूप से इनमें बड़ा अंतर है:

विशेषता रिटेल डिजिटल रुपया (e₹) यूपीआई (UPI) क्रिप्टोकरेंसी
जारीकर्ता (Issuer) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंक/एनपीसीआई विकेंद्रीकृत (कोई नियामक नहीं)
वास्तविक प्रकृति यह स्वयं में एक संप्रभु डिजिटल करेंसी है यह केवल बैंक जमा को ट्रांसफर करने का माध्यम है यह एक अत्यधिक अस्थिर डिजिटल एसेट है
मध्यस्थ (Intermediary) सीधे आरबीआई के लेजर पर सेटलमेंट (कोई मध्यस्थ बैंक नहीं) वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से लेन-देन का निपटारा ब्लॉकचेन नेटवर्क पर आधारित
स्थिरता रुपये के साथ 1:1 का स्थिर मूल्य रुपये के मूल्य पर आधारित अत्यधिक उतार-चढ़ाव और अस्थिर

संक्षेप में कहें तो, रिटेल डिजिटल रुपया सुरक्षा और केंद्रीय बैंक के भरोसे के साथ नकदी के डिजिटल रूप का एक बेहतरीन मिश्रण है. यह देश की वित्तीय पहुंच को बढ़ाने और डिजिटल लेन-देन को अधिक सुरक्षित व स्वतंत्र बनाने की दिशा में भारत सरकार का एक बड़ा कदम है.

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