क्या 1948 में निर्णायक स्थिति में थी भारतीय सेना? नेहरू के सीजफायर पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने अमित शाह को दिया जवाब
Jawaharlal Nehru, Sardar Vallabhbhai Patel (Photo Credits: Wikipedia)

नई दिल्ली: संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि 1948 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेना निर्णायक स्थिति में थी, और यदि नेहरू ने युद्धविराम (सीजफायर) नहीं किया होता, तो आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भारत का हिस्सा होता.

शाह ने कहा, “अगर PoK आज है, तो उसकी वजह जवाहरलाल नेहरू का युद्धविराम है.” उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में ले जाना नेहरू की एक "हिमालयन भूल" थी, जो आज भी भारत की क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित कर रही है.

सरदार पटेल को मिलनी चाहिए थी जिम्मेदारी: शाह

अमित शाह ने कहा कि यदि उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल को कश्मीर मुद्दे की जिम्मेदारी दी गई होती, तो हालात कुछ और होते. उन्होंने इंडस जल संधि (1960) को भी एकतरफा बताया और आरोप लगाया कि भारत के पास जल स्रोतों का नियंत्रण होते हुए भी उसने पाकिस्तान को 80% पानी दे दिया. अमित शाह ने विभाजन को भी कांग्रेस की "ऐतिहासिक गलती" करार देते हुए कहा, “पाकिस्तान का निर्माण कांग्रेस द्वारा विभाजन स्वीकारने के कारण हुआ.”

क्या 1948 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेना निर्णायक स्थिति में थी?

कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस का पलटवार: “इतिहास पढ़ें अमित शाह”

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शाह के आरोपों का जोरदार खंडन किया. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “प्रिय अमित शाह, देश को शर्मिंदा करने से पहले इतिहास पढ़ लीजिए.” खेड़ा ने सरदार पटेल की 4 जून 1948 की एक चिट्ठी का हवाला दिया, जो उन्होंने गोपालस्वामी अयंगर को लिखी थी. यह वही अयंगर हैं, जिन्होंने संविधान सभा में अनुच्छेद 370 को पेश किया था. खेड़ा ने पत्र के तीसरे बिंदु पर खास ध्यान दिलाया, जिससे यह संकेत मिलता है कि पटेल भी तत्कालीन फैसलों से सहमत थे.