महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में एक छोटा सा गांव है. जिस गांव का नाम नांदूर निम्बा दैत्य हैं. इस अनोखे गांव की परंपरा सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. यहां कोई भी व्यक्ति मारुति सुजुकी की कोई भी कार न तो खरीदता है, न चलाता है, और न ही गांव की सीमा के भीतर कोई मारुति गाड़ी दिखाई देती है.
जानें वजह?
बताया जाता गांव वालों की गहरी आस्था उनके आराध्य और रक्षक देवता “निम्बा दैत्य” में है. लोककथा के अनुसार, सदियों पहले निम्बा दैत्य और भगवान हनुमान (जिन्हें मारुति भी कहा जाता है) के बीच एक बड़ा विवाद हुआ था. मामला इतना बढ़ गया कि स्वयं भगवान श्रीराम को बीच-बचाव करना पड़ा। अंत में श्रीराम ने निम्बा दैत्य को गांव की रक्षा का पूरा अधिकार दे दिया और हनुमान जी को इस क्षेत्र में न आने का आदेश दिया. यह भी पढ़े: VIDEO: गुजरात के डाकोर मंदिर में अनोखी परंपरा! 2 हजार किलो का प्रसाद रखकर होती है लुट, 80 गांवों से इसमें शामिल होते है लोग
गांव में हनुमान जी से जुड़ी हर चीज वर्जित है
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गांव में कोई भी हनुमान मंदिर नहीं है.
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किसी बच्चे का नाम “हनुमान”, “मारुति” या “मरुति” नहीं रखा जाता.
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मारुति सुजुकी की गाड़ियाँ पूरी तरह प्रतिबंधित हैं.
गांव वाले मानते हैं कि हनुमान या मारुति नाम से जुड़ी कोई भी चीज गांव में आने से दुर्भाग्य आता है. इसलिए वे मारुति कार खरीदने या नाम लेने से पूरी तरह बचते हैं.
मशहूर किस्से
बताया जाता है कि कई साल पहले गांव के एक डॉक्टर ने मारुति 800 खरीदी थी.कार आने के कुछ ही दिनों बाद उनके क्लीनिक में मरीजों की संख्या लगभग बंद हो गई. लगातार नुकसान और परेशानियों के बाद उन्होंने कार बेच दी और टाटा सूमो ले ली. इसके बाद उनका काम फिर से पहले जैसा चलने लगा. इसी तरह कुछ अन्य किस्से भी हैं. जिस वजह से लोगो मारूति कर खरीदने और नाम रखने से बचते हैं.
अन्य देवी-देवताओं की होती है पूजा
हालांकि यह प्रतिबंध सिर्फ हनुमान जी से जुड़े नामों तक ही है। गांव वाले बाकी सभी देवताओं – गणेश जी, कृष्ण जी, दुर्गा माता आदि की पूजा बड़े धूमधाम से करते हैं.













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