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Ujjain Baba Mahakal: बाबा महाकाल ने दिया 'त्रिपुंड-चंद्रमा' वाले मनमोहक स्वरुप में दर्शन, भक्तों ने लगाए हर-हर महादेव के जयकारे

मंगलवार को उज्जैन बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों को बाबा के दिव्य दर्शन देखने को मिले. अगहन मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मंगलवार सुबह बाबा महाकाल ने त्रिपुंड और माथे पर चंद्रमा के साथ भक्तों को अद्भुत दर्शन दिए.

Ujjain Baba Mahakal: बाबा महाकाल ने दिया 'त्रिपुंड-चंद्रमा' वाले मनमोहक स्वरुप में दर्शन, भक्तों ने लगाए हर-हर महादेव के जयकारे

उज्जैन, 11 नवंबर : मंगलवार को उज्जैन बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों को बाबा के दिव्य दर्शन देखने को मिले. अगहन मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मंगलवार सुबह बाबा महाकाल ने त्रिपुंड और माथे पर चंद्रमा के साथ भक्तों को अद्भुत दर्शन दिए. बाबा का मनमोहक रूप देखकर भक्तों ने भी बाबा महाकाल के जयकारे लगाए और देर रात से ही श्रद्धालु बाबा की भस्म आरती का हिस्सा बनने के लिए लाइन में लगे दिखे.

अगहन मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर सुबह 4 बजे भस्म आरती के लिए पट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया और भस्म आरती की. महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की जाती है, जिसमें बाबा भक्तों को निराकार रूप में दर्शन देते हैं. भस्म आरती के बाद बाबा का चंदन से शृंगार किया गया और माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा पर फूलों पर माला अर्पित की गई. शृंगार के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. बाबा का चंदन रजत रूप देखने के लिए भक्तों ने लाइन लगाकर दर्शन किए और पूरा मंदिर बाबा के जयकारों से गूंज उठा. यह भी पढ़ें :Mulank 3 Personality: अंक ज्योतिष के अनुसार कैसे होते हैं मूलांक 3 के लोग? जानिए व्यक्तित्व और स्वभाव

बता दें कि भस्म आरती का हिस्सा बनने के लिए भक्तों को पहले ही ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होता है और इस दिन भस्म आरती के लिए नंबर या टोकन मिलता है और भक्त उसी दिन दर्शन के लिए आते हैं. पंजीकरण के लिए मंदिर द्वारा निर्धारित शुल्क भी देना होता है.

भस्म आरती का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं. माना जाता है कि महाकाल की आराधना से कालदोष, ग्रहदोष और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. साथ ही अगर राहु-केतु के दोष परेशान कर रहे हैं तो भी भक्तों को मंदिर में अनुष्ठान और पूजा-पाठ के लिए जरूर आना चाहिए. बता दें कि महाकाल की पूरे दिन में 6 बार आरती होती है और 6 आरतियों का अपना अलग महत्व होता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 11, 2025 11:45 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).