नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम फैसले में कहा कि नाबालिग लड़की के प्राइवेट पार्ट्स को छूना रेप या Penetrative Sexual Assault (गंभीर यौन हमला) की श्रेणी में नहीं आता. अदालत ने आरोपी की सजा कम करते हुए उसके अपराध को कम गंभीर धाराओं के तहत बदल दिया. यह फैसला यौन अपराधों की परिभाषा को लेकर चर्चा का विषय बन गया है.
पैसों से ऊपर है ममता और देखभाल, हाई कोर्ट ने अमीर पिता की जगह मां को दी बच्चे की कस्टडी.
यह मामला छत्तीसगढ़ के लक्ष्मण जांगड़े से जुड़ा है. उसे पहले नाबालिग के साथ रेप और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया गया था. निचली अदालत ने उसे कड़ी सजा सुनाई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी गवाहों और बयान को पढ़ने के बाद पाया कि सीधे तौर पर केवल प्राइवेट पार्ट्स को छूने का आरोप है.
प्राइवेट पार्ट्स को छूना रेप नहीं: सुप्रीम कोर्ट
View this post on Instagram
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा, “अगर केवल प्राइवेट पार्ट्स को छूने का मामला है और कोई Penetration नहीं हुई है, तो इसे रेप या गंभीर यौन हमला नहीं माना जा सकता.” अदालत ने कहा कि यह हरकत गंभीर है लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करना) और POCSO एक्ट की धारा 10 (कम गंभीर यौन अपराध) के तहत माना जाएगा.
सजा में किया बदलाव
अदालत ने लक्ष्मण जांगड़े की सजा घटाकर धारा 354 के तहत 5 साल और POCSO एक्ट की धारा 10 के तहत 7 साल की कठोर कैद कर दी. पहले उस पर रेप की धारा 376 AB और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत कड़ी सजा दी गई थी.













QuickLY