Today's Googly: जलेबी कहां इंवेंट हुई थी? आपकी सोच से परे हैं इसका जवाब

 Jalebi Kaha Invent Hui Thi? गर्म, कुरकुरी, चाशनी में डूबी जलेबी का नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाता है, है ना? भारत की गलियों से लेकर त्यौहारों तक, जलेबी हमारी पसंदीदा मिठाइयों में से एक है. यह दही के साथ हो या रबड़ी के साथ, इसका स्वाद लाजवाब होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह गोल-गोल स्वादिष्ट मिठाई आखिर आई कहाँ से? आज की गुगली यही है!

आपको जानकर शायद हैरानी हो, लेकिन जलेबी की जड़ें भारत में नहीं, बल्कि मध्य पूर्व (Middle East), खासकर प्राचीन फारस (Persia), यानी आज के ईरान में मानी जाती हैं. जी हाँ, हमारी प्यारी जलेबी एक विदेशी मेहमान है जिसने भारत आकर यहीं का होकर रह गया!

वहाँ इसे 'ज़लाबिया' (Zalabiya) या 'ज़ुलुबिया' (Zulubiya) जैसे नामों से जाना जाता था. इसका ज़िक्र 10वीं शताब्दी की पुरानी अरबी और फारसी पाक-कला की किताबों में भी मिलता है. इन किताबों में इसे बनाने की विधियाँ बताई गई हैं. हालाँकि, उस समय का रूप और स्वाद शायद आज की जलेबी से थोड़ा अलग रहा हो, लेकिन मूल विचार वही था - मैदे के घोल को तेल में तलकर शक्कर या शहद की चाशनी में डुबोना.

माना जाता है कि यह मिठाई मध्यकालीन युग में (लगभग 13वीं से 15वीं शताब्दी के बीच) फारसी और तुर्की व्यापारियों, सैनिकों या कारीगरों के साथ भारत पहुँची. भारत आकर यह मिठाई यहाँ के स्वाद और तरीकों के साथ ऐसी घुली-मिली कि यह पूरी तरह से भारतीय लगने लगी.

भारत में जलेबी को खूब प्यार मिला. यहाँ के हलवाइयों ने इसे अपना हुनर दिखाते हुए और भी स्वादिष्ट बना दिया. इसे दही या रबड़ी के साथ खाने का चलन शुरू हुआ, और यह त्यौहारों, शादियों और रोज़मर्रा की खुशियों का एक अहम हिस्सा बन गई. उत्तर भारत में सुबह के नाश्ते से लेकर गुजरात में फाफड़ा के साथ, जलेबी ने हर जगह अपनी खास पहचान बनाई है.

तो, अगली बार जब आप गरमा-गर्म जलेबी का आनंद लें, तो याद रखिएगा कि यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक है, जिसने मध्य पूर्व से चलकर भारत के दिलों में अपनी मिठास घोली है! भले ही इसका जन्म कहीं और हुआ हो, पर आज जलेबी पूरी तरह से भारतीय मिठास का प्रतीक बन चुकी है.