उपचुनाव में सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, भाजपा ने लगाया जोर

समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने लोकसभा की दो सीटों आजमगढ़ और रामपुर के उपचुनाव में अपना गढ़ बचाने चुनौती है. इन्हीं दोनों सीटों को जीतने के लिए भाजपा ने भी पूरी पूरा जोर लगा रखा है. आजमगढ़ सीट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व रामपुर सीट आजम खां के इस्तीफे के बाद खाली हुई है.

अखिलेश यादव (Photo Credits : Twitter)

लखनऊ, 11 जून : समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने लोकसभा की दो सीटों आजमगढ़ और रामपुर के उपचुनाव में अपना गढ़ बचाने चुनौती है. इन्हीं दोनों सीटों को जीतने के लिए भाजपा ने भी पूरी पूरा जोर लगा रखा है. आजमगढ़ सीट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) व रामपुर सीट आजम खां के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. दोनों ही सीटों पर भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. सपा ने यहां से अखिलेश के चचेरे भाई और पूर्व सांसद धर्मेंन्द्र यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है. उधर, आजमगढ़ में बसपा के मजबूती से चुनाव लड़ने के कारण सपा की मुश्किलें बढ़ गईं हैं. ऐसे में आजमगढ़ में मुलायम सिंह के परिवार और रामपुर में आजम की प्रतिष्ठा दांव पर है. जबकि इस चुनाव में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया. बसपा ने रामपुर सीट पर कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है. बसपा ने आजमगढ़ सीट पर शाह आलम (गुड्डू जमाली) को उतार कर दलित मुस्लिम का गठजोड़ बनाने का प्रयास किया है. जबकि भाजपा ने यहां से भोजपुरी स्टार निरहुआ को उतार कर सपा के कोर वोटर यादव और अन्य पिछड़ी जातियों पर सेंधमारी करने का प्रयास किया है.

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बावजूद सपा ये सीटें जीतने में सफल रही. उपचुनावों में भी सपा और भाजपा के बीच मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है. 2014 में जब सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, तो गुड्डू जमाली बसपा के उम्मीदवार थे. 2019 में यादव अपने बेटे अखिलेश के लिए आजमगढ़ सीट छोड़कर मैनपुरी चले गए. अखिलेश ने निरहुआ के 35.1 प्रतिशत की तुलना में 60 फीसद वोट हासिल किया था. यह भी पढ़ें : Maharashtra: मुंबई हवाई अड्डे का नाम बाल ठाकरे के नाम पर रखने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया: केंद्रीय मंत्री सिंधिया

अभी हाल में हुए विधानसभा चुनावों में सपा ने आजमगढ़ के सभी 10 विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की, यही वजह है कि यह सीट भाजपा की प्राथमिकता में है. राजनीतिक विश्लेषक प्रसून पांडेय बताते हैं कि आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में यादव 22 प्रतिशत, मुस्लिम 18 प्रतिशत, दलित 20 प्रतिशत व गैर यादव ओबीसी मतदाता करीब 18 प्रतिशत हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन था, जिसमें अखिलेश यादव को 6.21 लाख और भाजपा के दिनेश लाल यादव को 3.61 लाख मत मिले थे. स्थिति साफ है कि वर्ष 2019 में यादव, मुस्लिम के साथ दलित वोट भी सपा के साथ था. अब थोड़े हालत बदले हैं. अगर गुड्ड जमाली मुस्लिम वोटों पर सेंधमारी करते हैं तो ही भाजपा को कुछ फायदा हो सकता है.

पांडेय ने बताया कि रामपुर लोकसभा मुस्लिम बाहुल्य हैं. इनकी संख्या यहां पर निर्णायक भूमिका में है. इसी कारण सपा ने यहां से मुस्लिम प्रत्याशी भी उतारा है. इस सीट पर आजम का अपना रूतबा भी है. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रामपुर में पार्टी के टिकट का फैसला आजम खान पर छोड़ रखा था ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश ने रामपुर में पार्टी के टिकट का फैसला आजम खान पर छोड़ा था. आजम ने यहां से अपनी पत्नी के बजाय अपने करीबी नेता आसिम राजा उतारकर परिवारवाद के तोहमत से बचने का प्रयास किया है.

रामपुर में अब सीधा मुकाबला आसिम रजा और घनश्याम लोधी के बीच होगा. सपा से नाता तोड़कर भाजपा में जाने वाले घनश्याम भी कभी आजम के बेहद करीबी थे. यहां पर कांग्रेस और बसपा के वोटरों पर दोंनों दलों की निगाहें होंगी. उन्होंने बताया कि लोकसभा के उप चुनाव में यूपी की 75 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करने वाली भाजपा गंभीर है. रामपुर और आजमगढ़ की दो लोकसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में भी पूरी ताकत झोंकने के लिए कमर कस ली है. कुल 40 स्टार प्रचारक बनाए गए हैं, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ केंद्रीय मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद और संगठन पदाधिकारी लगाए गए हैं.

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