Delimitation Bill 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच बड़ा बयान दिया. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तावित डिलिमिटेशन प्रक्रिया में देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय या भेदभाव नहीं किया जाएगा. लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य, सभी के साथ समान व्यवहार किया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोकसभा सीटों में होने वाली बढ़ोतरी मौजूदा अनुपात के आधार पर ही होगी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. Delimitation Bill 2026: लोकसभा में आज पेश होगा परिसीमन विधेयक, विपक्ष ने 'खतरनाक योजना' बताकर किया कड़ा विरोध
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि विपक्ष को गारंटी चाहिए, तो वह इसके लिए भी तैयार हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ है और इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए. इस दौरान लोकसभा में तीन अहम विधेयकों पर चर्चा की गई, जिनमें डिलिमिटेशन बिल 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं. सरकार ने इन विधेयकों को जल्द लागू करने के उद्देश्य से संसद का विशेष सत्र बुलाया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों से अपील की कि इन विधेयकों को राजनीतिक नजरिए से न देखा जाए और सर्वसम्मति से पारित किया जाए. उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी एक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है.
महिला आरक्षण पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह महिलाओं पर कोई एहसान नहीं बल्कि उनका अधिकार है. उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से यह अधिकार लंबित रहा है और अब इसे लागू करने का सही समय है.
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने पहले महिला आरक्षण का विरोध किया, उन्हें देश की महिलाओं ने कभी माफ नहीं किया. उन्होंने कहा कि अगर सभी दल मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो इसका फायदा पूरे देश को मिलेगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में पंचायत स्तर पर लाखों महिलाएं नेतृत्व के रूप में उभरी हैं और अब उन्हें संसद और विधानसभाओं में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और यह संसद देश को नई दिशा देने का अवसर है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना समय की मांग है.
विपक्षी दलों ने जहां महिला आरक्षण विधेयक के जल्द लागू होने का समर्थन किया, वहीं डिलिमिटेशन बिल को लेकर चिंता जताई. विपक्ष का कहना है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के तरीके पर स्पष्टता जरूरी है और महिला आरक्षण को डिलिमिटेशन से अलग किया जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय हित में है और इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि संसद इस ऐतिहासिक अवसर का सही उपयोग करेगी और देश के लोकतंत्र को नई मजबूती मिलेगी.












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