कश्मीर में कई सालों बाद पर्यटकों पर आतंकवादियों ने किया हमला
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

कश्मीर में मतदान के ठीक पहले एक सरपंच और एक पर्यटक दंपति पर आतंकवादी हमले के बाद चिंता का माहौल है. वैसे तो कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं 2019 के बाद से भी जारी हैं लेकिन पर्यटकों पर हमला करीब सात सालों में पहली बार हुआ है.लोकसभा चुनावों में मतदान के पांचवें चरण में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान हो रहा है उनमें जम्मू और कश्मीर भी शामिल है. कश्मीर के बारामूला में मतदान के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं लेकिन पूरे प्रदेश में सुरक्षा की स्थिति को लेकर चिंता की खबरें आ रही हैं.

इसका कारण है शनिवार 18 मई को प्रदेश में हुए दो आतंकवादी हमले. इनमें से एक हमले में शोपियां जिले के हीरपुरा में आतंकवादियों ने पूर्व सरपंच एजाज अहमद शेख के घर में घुस कर उसे गोली मार दी.

पर्यटकों पर हमला

शेख को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां उनकी मौत हो गई. मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि शेख बीजेपी के टिकट पर सरपंच बने थे और आतंकवादियों ने उन्हें गोली मारने से पहले उनका पहचान-पत्र मांग कर उनकी पहचान की पुष्टि की.

इस हमले से करीब 15 मिनट पहले अनंतनाग जिले के पहलगाम में राजस्थान से आए तबरेज और उनकी पति फरहा आतंकवादियों के हमले में घायल हो गए. तबरेज को आंख में गोली लगी और फराह को कंधे पर. हमले के बाद उन्हें वहां से अस्पताल ले जाया गया और अब श्रीनगर में सेना के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ये दोनों अपने करीब 50 रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ 10 दिनों की यात्रा पर कश्मीर आए हुए थे. शनिवार शाम सभी लोग होटल की तरफ जा रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर सवार आतंकवादियों ने उन पर गोली चला दी.

उनके बच्चों और उनके समूह के बाकी सदस्यों ने छुपकर अपनी जान बचाई और बाद में दोनों को अस्पताल पहुंचाया. अभी तक किसी आतंकवादी संगठन ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है.

प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने इन हमलों की निंदा की है. पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा कि वो इन हमलों की कड़ी निंदा करते हैं.

दावों पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी एक्स पर इन हमलों की निंदा की और साथ में लिखा कि ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अनंतनाग में मतदान बिना किसी कारण के आगे बढ़ा दिया गया था. उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थिति सामान्य होने के केंद्र सरकार के दावों के बीच यह विशेष रूप से चिंता का विषय है.

अनंतनाग-राजौरी सीट में मतदान पहले सात मई को होना था लेकिन बाद में तारीख को बदल कर 25 मई कर दिया गया. पहलगाम में हुआ हमला पर्यटकों पर हमले की कई सालों में पहली वारदात है.

अब यह हमला प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. लोगों को अंदेशा है कि कहीं इसका असर पर्यटकों की आवाजाही पर ना पड़े. श्रीनगर में काम करने वाले पत्रकार रियाज वानी ने डीडब्ल्यू से कहा, "कई सालों में पहली बार कश्मीर में पर्यटकों पर हमला हुआ है और इस हमले की वजह से स्थिति चिंताजनक हो गई है."

रॉयटर्स के मुताबिक इसके पहले 2017 में अमरनाथ यात्रियों की एक बस पर आतंकवादी हमला हुआ था. 2019 में पुलवामा हमले के बाद भी कश्मीर में पर्यटकों की संख्या कम हो गई थी, लेकिन 2021 से फिर से पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी थी.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जहां 2019 में 5,65,532 पर्यटक कश्मीर गए, 2020 में इनकी संख्या घट कर 41,267 हो गई थी. लेकिन 2021 में संख्या फिर से बढ़ी और 6,65,777 हो गई. 2022 में 26,73,442 और 2023 में 27,10,497 पर्यटक कश्मीर गए.

लेकिन इस घटना के बाद कश्मीर में पर्यटन से जुड़े व्यापारियों के मन में यह चिंता घर कर गई है कि कहीं इस घटना से डर कर प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या कम ना हो जाए. दिल्ली से सटे गुरुग्राम में रहने वाली अदिति सिन्हा ऐसे ही पर्यटकों में से एक हैं.

अदिति जून में अपने परिवार के साथ कश्मीर जाने वाली थीं और पहलगाम जाना भी उनकी योजना में शामिल था. लेकिन इस हमले के बारे में पढ़ कर वो अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गईं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "मुझे लगा शायद यह कश्मीर जाने का सही समय नहीं है. इसलिए मैंने यात्रा रद्द कर दी."

मतदान पर असर?

अब 25 मई को यह देखना होगा कि अनंतनाग-राजौरी सीट पर होने वाले मतदान पर इन दोनों घटनाओं का कोई असर पड़ता है या नहीं. सोमवार को हुए मतदान में दिन के तीन बजे तक 45 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.

बारामुला में करीब 45 प्रतिशत और लद्दाख में करीब 61.26 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा (62.72) और महाराष्ट्र में सबसे कम (38.77) मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया.

दिन के तीन बजे तक चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल से करीब 1036 शिकायतें भी मिलीं. ये शिकायतें ईवीएम में कराबी, एजेंटों को मतदान केंद्र में घुसने देने से रोकने और मतदाताओं को मतदान से रोकने या धमकाने से जुड़ी थीं.