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कर्नाटक में किशोरियों की गर्भावस्था में 54 फीसदी उछाल, सरकार की बढ़ी चिंता

कर्नाटक में पिछले तीन वर्षों में किशोरियों की गर्भावस्था के मामलों में 54% की चौंकाने वाली बढ़ोतरी हुई है. महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर का कहना है कि यह बढ़ोतरी सोशल मीडिया के अधिक प्रभाव, किशोर प्रेम प्रसंगों, और असुरक्षित माहौल का नतीजा है.

कर्नाटक में किशोरियों की गर्भावस्था में 54 फीसदी उछाल, सरकार की बढ़ी चिंता

कर्नाटक में पिछले तीन वर्षों में किशोरियों की गर्भावस्था के मामलों में 54% की चौंकाने वाली बढ़ोतरी हुई है. महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर का कहना है कि यह बढ़ोतरी सोशल मीडिया के अधिक प्रभाव, किशोर प्रेम प्रसंगों, और असुरक्षित माहौल का नतीजा है. 2022-23 में 405, 2023-24 में 709 और 2024-25 में 685 मामले दर्ज हुए. कुल 1,799 नाबालिग गर्भावस्थाएं.

इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार 15 अगस्त से ‘अक्का फोर्स’ (अक्का पडे) शुरू करने जा रही है. इसमें महिला पुलिस अधिकारी और एनसीसी कैडेट शामिल होंगे, जो कॉलेजों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर गश्त करेंगे, ताकि शिकारियों पर नजर रखी जा सके और किशोरियों को सुरक्षित माहौल मिले.

सोशल मीडिया और बदलता समाज

मंत्रालय के अध्ययन के मुताबिक, अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग, POCSO मामलों में बढ़ोतरी, और बाल विवाह की परंपरा ने मिलकर यह स्थिति बनाई है.

किशोर रिश्तों में बढ़ोतरी

  • परिवार की संरचना में बदलाव
  • कुछ समुदायों में अब भी नाबालिग की शादी की प्रथा
  • “सेल्फ-जनरेटेड पोर्न” और ऑनलाइन ब्लैकमेल
  • ये सभी कारण ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में समस्या को फैला रहे हैं.

विशेषज्ञों की चेतावनी

चाइल्ड राइट्स ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक वासुदेव शर्मा एन.वी. का कहना है, "पहले टीवी, फिल्म या मैगजीन को दोष दिया जाता था, अब मोबाइल पर वीडियो, रील्स और अश्लील कंटेंट तक आसान पहुंच ने किशोरों में जिज्ञासा और प्रयोग की प्रवृत्ति बढ़ा दी है."

वो यह भी बताते हैं कि गर्भनिरोधक साधनों और टेस्ट किट की आसान उपलब्धता भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है. समाधान के लिए लाइफ स्किल्स, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और इसके परिणामों की समझ जरूरी है.

कड़ा कानून भी आएगा

सरकार ने विधानसभा में बाल विवाह निषेध (कर्नाटक संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया है. इसके तहत बाल विवाह की योजना या तैयारी करने पर 2 साल की सख्त कैद या 1 लाख जुर्माना. नाबालिग की सगाई भी अमान्य होगी और अदालतें शादी रोकने के लिए तुरंत आदेश दे सकेंगी.

गांव-गांव तक निगरानी

ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक महिला एवं बाल अधिकार निगरानी समितियां बनाई जाएंगी, जो सुनिश्चित करेंगी कि कोई नाबालिग इस जाल में न फंसे. मंत्री हेब्बलकर के अनुसार, यह लड़ाई अपराध के साथ-साथ मानसिकता के खिलाफ भी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 14, 2025 04:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).