हर बच्चे को माता-पिता दोनों का प्यार पाने का हक है, पेरेंट्स के झगड़े में पिस रहे बच्चों के लिए सुप्रीम कोर्ट बना सहारा
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सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत ही अहम और दिल छू लेने वाला फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा है कि हर बच्चे को अपने माता और पिता, दोनों का प्यार और स्नेह पाने का पूरा अधिकार है. भले ही माता-पिता अलग रहते हों या फिर अलग-अलग देशों में, बच्चे को दोनों से जुड़ाव बनाए रखने का मौका मिलना ही चाहिए.

यह मामला एक ऐसे पिता का था, जिनका 9 साल का बेटा अपनी मां के साथ आयरलैंड में रहता है. पिता भारत में रहते थे और अपने बेटे से बात करना चाहते थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि उन्हें अपने बेटे से वीडियो कॉल पर नियमित रूप से बात करने की इजाजत दी जाए. पिता ने बच्चे की कस्टडी (हिरासत) नहीं मांगी, बल्कि सिर्फ बेटे के साथ जुड़े रहने का एक मौका चाहा था.

अदालत ने क्या कहा?

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. उन्होंने कहा कि माता-पिता के बीच के आपसी मतभेद और झगड़े चाहे कितने भी गहरे क्यों न हों, हम बच्चे को इस लड़ाई का शिकार नहीं बनने दे सकते.

अदालत ने कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  1. बच्चे का अधिकार: हर बच्चे का यह अधिकार है कि उसे माता-पिता दोनों का प्यार मिले. पिता से संपर्क न करने देना बच्चे को उनके प्यार, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहारे से वंचित करने जैसा होगा.
  2. पिता की मांग जायज़: अदालत ने कहा कि पिता की वीडियो कॉल पर बात करने की मांग पूरी तरह से जायज़ और ज़रूरी है. इससे बच्चे की मौजूदा ज़िन्दगी में कोई खलल भी नहीं पड़ेगा और पिता भी उसकी ज़िन्दगी का हिस्सा बने रहेंगे.
  3. बच्चे का हित सबसे ऊपर: अदालत ने माना कि बच्चा अभी अपनी माँ के साथ आयरलैंड में settled है और इस व्यवस्था को छेड़ना ठीक नहीं होगा. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि उसे पिता के प्यार से दूर कर दिया जाए.

कोर्ट का अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने पिता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बातचीत की इजाजत दे दी. अदालत ने निर्देश दिए कि:

  • पिता हर दूसरे रविवार को आयरलैंड के समय के अनुसार सुबह 10 बजे से 12 बजे तक (दो घंटे) अपने बेटे से वीडियो कॉल पर बात कर सकेंगे.
  • माता और पिता दोनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बातचीत बिना किसी रुकावट या दुश्मनी के, अच्छी भावना के साथ हो.
  • अगर वीडियो कॉल में कोई तकनीकी दिक्कत आती है, तो उसे आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा, क्योंकि बच्चे का हित सबसे ऊपर है.

यह फैसला उन सभी माता-पिता के लिए एक बड़ा संदेश है जो अलग हो चुके हैं. यह बताता है कि आपके आपसी रिश्ते कैसे भी हों, बच्चे के भावनात्मक स्वास्थ्य और उसके अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता.