नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद की पूरी साइट के एएसआई सर्वेक्षण का निर्देश दिया गया था.
न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट और अन्य को नोटिस जारी किया।पीठ में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा भी शामिल थे.
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि निचली अदालतें सर्वेक्षण रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं करेंगी. एएसआई द्वारा संबंधित परिसर में कोई ऐसी भौतिक खुदाई नहीं की जानी चाहिए, जो वास्तव में संरचना के चरित्र को बदल सकती है. यह भी पढ़े :Viral Video: मंदिर में पूजा के दौरान सिर पर फोड़ा नारियल, स्टंट के बाद बेहोश हुआ युवक, देखें वीडियो
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने एएसआई को साइट की पूरी वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और खुदाई करने का आदेश दिया था, जिसमें जमीन के ऊपर और नीचे विभिन्न संरचनाओं की उम्र जानने के लिए कार्बन डेटिंग भी शामिल थी.
हाई कोर्ट ने कहा था कि विवादित परिसर में पूजा और अनुष्ठान करने के अधिकार पर एएसआई के कम से कम पांच वरिष्ठतम अधिकारियों की विशेषज्ञ समिति से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही विचार और निर्धारण किया जाएगा.
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि समय-समय पर तैयार की गई कई एएसआई रिपोर्टों में कहा गया है कि मूल रूप से निर्मित भोजशाला और वाग्देवी मंदिर को इस्लामी शासकों और ताकतों के कहने पर मस्जिद स्थापित करने और निर्माण करने के लिए नष्ट कर दिया गया था.
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