शिवसेना नेता संजय राउत का बड़ा बयान, कहा- ट्रिपल तलाक और धारा 370 के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड अगला टारगेट
बता दें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का मतलब होता है कि देश में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के एक समान कानून हो. फिर चाहे हो किसी भी धर्म का क्यों न हो. यूनिफॉर्म सिविल कोड का किसी धर्म-जाती से कोई संबंध नहीं होता है. इसमें शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे के दौरान एक समान कानून सभी लोगों के लिए लागू होगा. यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता फिलहाल हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म इसके अंतर्गत आते हैं. जबकि मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय का पर्सनल लॉ है.
केंद्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने सरकार से मांग की है कि देश में अब यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना चाहिए. शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि अनुच्छेद 370 ( Article 370) जैसे जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और ट्रिपल तलाक बिल (Triple Talaq Bill ) को पास किया गया. ठीक उसी तरह से अब देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड ( uniform civil code) भी मुझे लगता है ये जल्दी ही लागू हो जाएगा.
बता दें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का मतलब होता है कि देश में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के एक समान कानून हो. फिर चाहे हो किसी भी धर्म का क्यों न हो. यूनिफॉर्म सिविल कोड का किसी धर्म-जाती से कोई संबंध नहीं होता है. इसमें शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे के दौरान एक समान कानून सभी लोगों के लिए लागू होगा. यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता फिलहाल हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म इसके अंतर्गत आते हैं. जबकि मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय का पर्सनल लॉ है.
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Sanjay Raut, Shiv Sena: The government has brought Triple Talaq Bill and revoked Article 370 in Jammu and Kashmir, it is a beginning towards bringing a uniform civil code in the country. I think it will be implemented in the country soon. pic.twitter.com/OZQvmLTG7D
— ANI (@ANI) August 16, 2019
गौरतलब हो कि यूनिफॉर्म सिविल कोड पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान और इजिप्ट जैसे कई देश है जहां पर ये कानून लागू हैं. बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर एकजुटता, भाईचारा, राष्ट्रीय अखंडता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र को समान नागरिक संहिता बनाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 16, 2019 12:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

