SC on Domestic Violence: घरेलू हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पति अपनी पत्नी के साथ जानवर जैसा व्यवहार नहीं कर सकता

SC on Domestic Violence: भारत के उच्चतम न्यायालय ने घरेलू हिंसा के एक मामले में आरोपी पति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी पति को अपनी पत्नी के साथ "जानवर की तरह" व्यवहार करने का अधिकार नहीं है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के पिछले आदेश को बरकरार रखा और आरोपी को निर्देश दिया कि वह सामान्य कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से नियमित जमानत के लिए आवेदन करे.

शराब के नशे में मारपीट का आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है. आरोप है कि व्यक्ति ने शराब के नशे में अपनी पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट की, उसे जमीन पर पटक दिया जिससे महिला का सिर ईंट से जा टकराया. इसके अलावा, उस पर डंडे से हमला करने का भी आरोप है. अदालत में यह भी सामने आया कि आरोपी ने तीन शादियां की हैं, हालांकि उसने शिकायतकर्ता के साथ कानूनी विवाह से इनकार किया है.   यह भी पढ़े:  Domestic Violence Case: मुंबई सेशन कोर्ट ने महिला के पति और उसके परिवार के ‘करोड़पति’ होने की जानकारी के बाद उसे दी जाने वाली कॉम्पेंजेशन राशि 5 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी

"जानवर जैसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं": सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान जस्टिस वराले ने आरोपी के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि पत्नी के साथ पशुवत व्यवहार करने का कोई औचित्य नहीं हो सकता. वहीं, जस्टिस कुमार ने आरोपी से सीधे सवाल किया, "आप अपनी पत्नी को क्यों पीटना चाहते हैं? जाइए और नियमित जमानत मांगिए." आरोपी की कई शादियों का जिक्र करते हुए न्यायाधीश ने कहा, "आपकी तीन पत्नियां हैं; यदि आप इसी तरह शारीरिक हमला जारी रखेंगे, तो यह महिला भी अंततः आपको छोड़ देगी."

घरेलू हिंसा और शराब के सेवन पर टिप्पणी

जस्टिस कुमार ने कानूनी सहायता कार्यक्रमों के अपने अनुभवों को साझा करते हुए घरेलू हिंसा के पीछे के कारणों पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने नोट किया कि पुलिस स्टेशनों में आने वाली अधिकतर शिकायतें शराब के सेवन और उसके बाद होने वाली मारपीट से जुड़ी होती हैं. न्यायाधीश ने बताया कि कई बार महिलाएं पुलिस से कहती हैं कि उन्हें पति के शराब पीने से उतनी आपत्ति नहीं है, जितनी शराब पीने के बाद होने वाली शारीरिक प्रताड़ना से है, जो उन्हें कानूनी मदद लेने पर मजबूर करती है.

कानूनी कार्यवाही और अगला कदम

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचा जब पटना हाई कोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तारी से पहले मिलने वाली सुरक्षा (Anticipatory Bail) देने से मना कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब स्थानीय अधिकारियों के लिए जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है. अब आरोपी को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना होगा और ट्रायल कोर्ट में नियमित जमानत के लिए अर्जी देनी होगी.