Raj Thackeray Acquitted: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे को ठाणे की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को 2008 के रेलवे भर्ती आंदोलन से जुड़े हिंसा के मामले में बरी कर दिया है. इस फैसले के साथ ही करीब 18 साल पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है. सुनवाई के दौरान राज ठाकरे खुद अदालत में मौजूद थे. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा.
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
ठाणे सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और गवाहों के बयान राज ठाकरे या अन्य मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपराध साबित नहीं करते. अदालत ने राज ठाकरे को उस कथित भड़काऊ भाषण के आरोपों से भी राहत दे दी, जिसे इस आंदोलन और हिंसा की मुख्य वजह बताया जा रहा था. यह भी पढ़े: Raj Thackeray in Mumbai Local: मोर्चे के लिए राज ठाकरे ने किया दादर से चर्चगेट तक लोकल ट्रेन से सफर, लोगों के साथ की बातचीत: VIDEO
राज ठाकरे कोर्ट से बरी:
Thane, Maharashtra: MNS chief Raj Thackeray has been acquitted in a case related to the 2008 railway recruitment agitation. The Thane Sessions Court stated that the prosecution failed to present sufficient evidence to establish the offence or clearly prove the involvement of the… pic.twitter.com/3CX4ZTFiut
— IANS (@ians_india) May 21, 2026
जानें फैसले पर राज के वकील ने क्या कहा
Thane, Maharashtra: MNS chief Raj Thackeray’s lawyer, Sayaji Nangre, says, "The court examined the evidence and statements of all the witnesses. After reviewing the evidence, it was found that there was no sufficient evidence to connect the persons to the crime. On that basis,… pic.twitter.com/SjtON0vtrD
— IANS (@ians_india) May 21, 2026
वकील ने दी मामले की जानकारी
फैसले के बाद राज ठाकरे के वकील सयाजी नांगरे ने मीडिया को बताया कि अदालत ने सभी गवाहों के बयानों और पेश किए गए सबूतों की बारीकी से जांच की. नांगरे ने कहा, "सभी साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो आरोपियों को इस अपराध से सीधे जोड़ता हो. इसी आधार पर कोर्ट ने सभी को ससम्मान बरी कर दिया है."
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2008 का है, जब कल्याण रेलवे स्टेशन पर रेलवे भर्ती परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई थी. मनसे कार्यकर्ताओं पर आरोप था कि उन्होंने परीक्षा देने आए उत्तर भारतीय उम्मीदवारों पर हमला किया और रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.
उस समय राज ठाकरे पर आरोप लगे थे कि उन्होंने स्थानीय मराठी युवाओं के रोजगार के अधिकार को लेकर भड़काऊ भाषण दिए, जिससे प्रवासियों के खिलाफ हिंसा भड़की.
18 साल पुराना कानूनी घटनाक्रम
इस विवाद के बाद राज ठाकरे और कई मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए उस वक्त राज ठाकरे को गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें अदालत से राहत मिल गई थी. इस केस की सुनवाई पहले कल्याण की अदालत में चल रही थी, जिसे बाद में ठाणे की रेलवे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था. अब 18 साल बाद आए इस फैसले से मनसे प्रमुख को बड़ी राहत मिली है.













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