Air India हादसे के बाद 112 पायलट बीमार! जानिए क्यों बढ़ रही है पायलटों में मानसिक दबाव की चिंता
12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरते ही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जहां पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं अब इस हादसे का असर एयर इंडिया के पायलटों की मानसिक स्थिति पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
नई दिल्ली: 12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरते ही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जहां पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं अब इस हादसे का असर एयर इंडिया के पायलटों की मानसिक स्थिति पर भी साफ दिखाई दे रहा है. हादसे के कुछ ही दिनों बाद, एयर इंडिया के 112 पायलटों ने एक ही दिन में बीमार होने की सूचना दी, जिससे एविएशन सेक्टर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छिड़ गई है.
गौरतलब है कि 12 जून को एयर इंडिया की बोइंग 787-8 विमान, जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए रवाना हुआ था, टेक-ऑफ के कुछ ही समय बाद एक इमारत से टकरा गया. इस दुर्घटना में 241 यात्रियों और 19 जमीन पर मौजूद लोगों की मौत हो गई. केवल एक यात्री इस भीषण हादसे से जीवित बच पाया.
हादसे के बाद बीमार पायलटों की संख्या में उछाल
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोळ ने लोकसभा में जानकारी दी कि 16 जून को एयर इंडिया के कुल 112 पायलट बीमार पड़े. इनमें 51 कमांडर (P1) और 61 फर्स्ट ऑफिसर (P2) शामिल हैं. मंत्री ने कहा कि हालांकि यह संख्या थोड़ी अधिक थी, लेकिन इसे "सामूहिक छुट्टी" के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
DGCA ने उठाए मानसिक स्वास्थ्य पर कदम
हादसे के बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइनों को फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम (कस्टमाइज्ड ट्रेनिंग कैप्सूल) लागू करने की सलाह दी है. इसके साथ ही, DGCA ने "पीयर सपोर्ट प्रोग्राम (PSP)" को भी अनिवार्य किया है, जिसके तहत पायलटों और अन्य कर्मचारियों को मानसिक तनाव से उबरने में मदद मिल सकेगी.
मानसिक दबाव बना बड़ी चुनौती
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत की एविएशन इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य को उतनी प्राथमिकता मिल रही है, जितनी मिलनी चाहिए? एक झटके में इतने पायलटों का बीमार होना यह संकेत देता है कि हादसे के बाद के मानसिक प्रभाव गहरे हो सकते हैं. जानकारों का मानना है कि दुर्घटनाओं के बाद क्रू मेंबर्स को थेरेपी और काउंसलिंग की सख्त जरूरत होती है.
जमीन पर मारे गए लोगों को मुआवजा नहीं
एक और हैरान करने वाली बात यह रही कि सरकार ने संसद में यह भी बताया कि मंत्रालय के पास ऐसी कोई विशेष नीति नहीं है, जिसके तहत विमान हादसे में जमीन पर मारे गए नागरिकों को मुआवज़ा दिया जा सके. इस पर भी बहस शुरू हो गई है कि क्या अब समय आ गया है कि इस विषय में एक मजबूत नीति बने.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2025 05:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

