पश्चिम बंगाल सरकार का फैसला, धन की कमी के कारण केंद्र की योजनाओं को लागू कर सकती है
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शुरू की गई सामाजिक योजनाओं की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए धन की कमी के कारण, पश्चिम बंगाल सरकार धीरे-धीरे केंद्रीय परियोजनाओं की ओर झुक रही है, जिसका सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कुछ समय पहले कड़ा विरोध किया था.
कोलकाता, 24 अक्टूबर: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) द्वारा शुरू की गई सामाजिक योजनाओं की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए धन की कमी के कारण, पश्चिम बंगाल सरकार धीरे-धीरे केंद्रीय परियोजनाओं की ओर झुक रही है, जिसका सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कुछ समय पहले कड़ा विरोध किया था. यह भी पढ़े:Bengal Violence: सड़कों पर उतरे ISKCON मंदिर के भक्त, दुनिया के 150 देशों में बंगाल हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी लेने के संबंध में अंतिम नीतिगत निर्णय नहीं लिया है, शीर्ष अधिकारियों ने पहले सभी विभागों को यह देखने का निर्देश दिया है कि क्या केंद्रीय परियोजनाओं के वित्तीय लाभों का उपयोग राज्य में परियोजनाओं के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है. जिन दो क्षेत्रों में राज्य ने केंद्रीय सहायता के लिए पहले ही मंजूरी दे दी है, वे हैं आयुष्मान भारत - नागरिकों के लिए स्वास्थ्य योजना और किसानों के लिए फसल बीमा योजना 'कृषक बंधु'. केंद्र के आयुष्मान भारत का मुकाबला करते हुए राज्य ने अपनी स्वयं की योजना 'सस्त्य साथी प्रोकोल्पो' शुरू की थी, जिसमें राज्य के सभी नागरिकों को 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज दिया गया था.
एक अनुमान के मुताबिक इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य को सालाना लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. एक साल पहले भी यह अनुमान लगभग 925 करोड़ रुपये था, लेकिन जब बनर्जी ने चुनाव से पहले घोषणा की कि राज्य के सभी नागरिकों को 'शस्त साथी' के तहत कवर किया जाएगा, तो बजट बढ़ गया था. कई अन्य परियोजनाएं हैं जिनमें भारी लागत शामिल है और राज्य के वित्त में गंभीर सेंध लगा रही है. हाल ही में घोषित 'लखमीर भंडार परियोजना' में अधिकारियों के अनुसार, जहां राज्य एससी/एसटी/ओबीसी समुदायों की महिलाओं को 1,000 रुपये और सामान्य जाति की महिलाओं को 500 रुपये देगा, सरकार ने इसके लिए 12,900 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. लगभग 1.8 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने अब तक इस योजना के लिए अपना पंजीकरण कराया है.
इसके अलावा, राज्य ने कन्याश्री परियोजना पर 8,277 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, जहां अब तक 2,39,66,510 लड़कियों को उनकी शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता दी गई है. इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लड़कियां स्कूल में रहें और कम से कम 18 वर्ष की आयु तक उनकी शादी ना की जाए. योजना को दो चरणों में बांटा गया है. पहला 750 रुपये का वार्षिक प्रोत्साहन है जो 13 से 18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों को भुगतान किया जाना है.
वित्त विभाग ने कहा कि इसके अलावा कई अन्य सामाजिक योजनाएं हैं जैसे सबुजश्री, जोल धोरो जोल भोरो, मुफ्त राशन प्रणाली, दुआरे सरकार जो राज्य के खजाने पर भी भारी दबाव डाल रही है. पिछले साल तालाबंदी और महामारी के कारण राजस्व बहुत कम है और इस साल भी राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत कम दिख रहे हैं. इस स्थिति में राज्य के लिए अपने विकास कार्यों को जारी रखना और साथ ही साथ योजनाओं को जारी रखना मुश्किल हो रहा है.
हालांकि ममता बनर्जी ने अभी तक राज्य में केंद्रीय योजनाओं को अनुमति देने के लिए कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया है, ऐसे संकेत हैं कि राज्य सरकार राज्य द्वारा संचालित योजनाओं में केंद्रीय अनुदान का उपयोग करने के प्रति नरम हो रही है. राज्य पहले से ही स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में केंद्रीय परियोजना में बड़ी हिस्सेदारी ले रहा है. अन्य मामलों में विभिन्न विभागों के अधिकारी संभावनाओं की जांच कर रहे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 24, 2021 07:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

