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अखिलेश यादव के घर का पता बदला, इस घर में हुए शिफ्ट, कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

बता दें कि अखिलेश यादव ने जब सरकारी बंगला खाली किया था तब उस वक्त बड़ा सियासी घमासान मचा था. अखिलेश यादव के घर छोड़ने के बाद आरोप लगा था कि सरकारी बंगले में तोड़-फोड़ की गई थी.

अखिलेश यादव के घर का पता बदला, इस घर में हुए शिफ्ट, कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
अखिलेश यादव (Photo Credits: ANI)

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने गुरुवार को अपने नए बंगले में गृह प्रवेश कर लिया है. अब उनके नए घर का पता लखनऊ के पॉश इलाके में 1-विक्रमादित्य मार्ग का होगा. गृह प्रवेश के दौरान उनकी पत्नी डिंपल यादव (Dimple Yadav), बच्चे व कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. सरकारी आवास छोड़ने के बाद से अखिलेश यादव अंसल सिटी में रह रहे थे.

बता दें कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने जब सरकारी बंगला खाली किया था तब उस वक्त बड़ा सियासी घमासान मचा था. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के घर छोड़ने के बाद आरोप लगा था कि सरकारी बंगले में तोड़-फोड़ की गई थी. हालांकि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि सरकारी बंगले में तोड़फोड़ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के इशारे पर हुआ था. यह भी पढ़े-करारी हार के बाद मुलायम की राह पर अखिलेश यादव, संगठन में होगा ये बड़ा बदलाव

वहीं दूसरी ओर बीजेपी (BJP) कार्यकर्ताओं के साथ ही यूपी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी आरोप लगाया था कि सरकारी बंगले से एसी और टाइल्स को नहीं निकालना चाहिए था. ये सब सरकारी संपत्ति थी. ऐसा करके अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश का उल्लंघन किया है.

मुलायम यादव का भी बदला पता.

बता दें कि हाल ही में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने नए आवास का गृह प्रवेश किया था. उनके नए घर का पता 8, विक्रमादित्य मार्ग है. इस मौके पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) व डिंपल यादव (Dimple Yadav) समेत परिवार के सदस्य शामिल हुए थे.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 1 अगस्त, 2017 को फैसला सुनाया था कि मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) समेत राज्य के सभी छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो महीने के भीतर सरकारी बंगला खाली करना होगा. शीर्ष अदालत ने कहा था कि 1997 के जिस नियम के तहत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिया गया है, उसका कोई कानूनी आधार नहीं है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 30, 2019 03:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).