KDMC Election Result 2026: . ठाणे जिले के महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) के चुनाव परिणामों में महायुति गठबंधन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है. शुक्रवार को जारी मतगणना के रुझानों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन बहुमत के आंकड़े की ओर तेजी से बढ़ रहा है. मतदान के पहले ही 20 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल करने के बाद, अब चुनावी मैदान में भी महायुति के उम्मीदवार विपक्षी दलों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं.
'शिंदे दुर्ग' में विपक्ष पस्त
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जनपद ठाणे के बाद कल्याण-डोंबिवली को भी उनका मजबूत गढ़ माना जाता है. ताजा रुझानों में महायुति 60 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे (MNS) को कुछ ही वार्डों में सफलता मिलती दिख रही है. चुनाव से पहले हुए सीट बंटवारे में शिवसेना को 65 और भाजपा को 57 सीटें दी गई थीं, जो अब सफल रणनीति साबित हो रही है. यह भी पढ़े: BMC Election Result 2026: मुंबई में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद जश्न की तैयारी, दोपहर 3.30 बजे कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे देवेंद्र फडणवीस
म्हात्रे परिवार का दबदबा बरकरार
इन चुनावों में स्थानीय स्तर पर म्हात्रे परिवार का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला है. प्रभाग क्रमांक 21 में म्हात्रे परिवार के तीन सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. प्रल्हाद म्हात्रे ने मनसे के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि डॉ. रवीना म्हात्रे भाजपा से और रेखा म्हात्रे शिवसेना (शिंदे गुट) से विजयी रहीं. यह स्थानीय राजनीति में इस परिवार के प्रभाव को दर्शाता है.
निर्विरोध जीत ने तय की थी दिशा
केडीएमसी की कुल 122 सीटों में से 20 सीटों पर महायुति के उम्मीदवार मतदान से पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए थे. इसमें भाजपा के 14 और शिंदे सेना के 6 उम्मीदवार शामिल थे. विपक्ष द्वारा कई सीटों पर नामांकन वापस लेने या तकनीकी कारणों से पर्चे रद्द होने के कारण महायुति को मनोवैज्ञानिक बढ़त पहले ही मिल चुकी थी.
विकास और स्थानीय मुद्दे रहे प्रभावी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोंबिवली और कल्याण में बुनियादी ढांचे के विकास, सड़कों की स्थिति और मुख्यमंत्री के प्रति जनता के भरोसे ने महायुति के पक्ष में काम किया है. हालांकि, विपक्षी दलों ने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार और खस्ताहाल सड़कों का मुद्दा उठाया था, लेकिन परिणामों में मतदाताओं ने सत्ताधारी गठबंधन पर ही विश्वास जताया है.













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