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भारत-पाक मैच पर मचा घमासान, मैदान से पहले राजनीतिक मैदान में भिड़ंत, अनुराग ठाकुर ने बताई खेलने की मजबूरी

भारत में 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. विपक्षी दल आतंकी हमलों का हवाला देते हुए मैच के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं. वहीं, सरकार का तर्क है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है और इसमें न खेलने पर भारत बाहर हो सकता है.

भारत-पाक मैच पर मचा घमासान, मैदान से पहले राजनीतिक मैदान में भिड़ंत, अनुराग ठाकुर ने बताई खेलने की मजबूरी

दुबई में 14 सितंबर को एशिया कप का सबसे बड़ा मुकाबला, यानी भारत और पाकिस्तान का मैच होना है. लेकिन इस मैच की जितनी चर्चा क्रिकेट के मैदान के लिए हो रही है, उससे कहीं ज्यादा भारत के राजनीतिक गलियारों में हो रही है. विपक्ष ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सरकार को घेरा है और मांग की है कि इस मैच को रद्द किया जाए. इस पूरे विवाद पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या खेल और आतंकवाद को अलग-अलग देखा जाना चाहिए?

सरकार की दलील: "नहीं खेले तो टूर्नामेंट से बाहर हो जाएंगे"

इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने साफ-साफ कहा कि यह कोई दो देशों के बीच की सीरीज नहीं है, बल्कि एक मल्टी-नेशनल टूर्नामेंट (ACC या ICC द्वारा आयोजित) है. ऐसे टूर्नामेंट में हिस्सा लेना सभी देशों के लिए जरूरी होता है.

उनके मुताबिक, "अगर हम मैच नहीं खेलते हैं, तो हमें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ेगा. हमें मैच छोड़ना होगा और पाकिस्तान को बिना खेले ही अंक मिल जाएंगे."

अनुराग ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की नीति बिल्कुल साफ है. उन्होंने कहा, "जब तक पाकिस्तान भारत पर आतंकवादी हमले बंद नहीं कर देता, तब तक भारत उसके साथ कोई भी द्विपक्षीय (दो-तरफा) सीरीज नहीं खेलेगा."

विपक्ष का हमला: "खून और क्रिकेट एक साथ कैसे?"

विपक्षी दल सरकार की दलीलों से सहमत नहीं हैं. आम आदमी पार्टी (आप) और शिवसेना (UBT) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है.

आम आदमी पार्टी का गुस्सा: 'आप' नेता संजीव झा ने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय विधवाओं का मजाक उड़ाने वाली एक पुरानी घटना का जिक्र किया. उन्होंने कहा, "मोदी जी ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा. तो खून और क्रिकेट एक साथ कैसे हो सकता है?" उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की बहनों का अपमान हुआ हो, तो हम दुश्मनों के साथ क्रिकेट कैसे खेल सकते हैं?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "प्रधानमंत्री जी को पाकिस्तान के साथ मैच करवाने की आखिर क्या ज़रूरत है? क्या ये भी ट्रंप के दबाव में किया जा रहा है?"

शिवसेना का बहिष्कार का आह्वान: शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस मैच का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि एक तरफ हमारे जवान सीमा पर लड़ रहे हैं और "ऑपरेशन सिंदूर" जैसी कार्रवाइयां चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हम पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं. उन्होंने इसे "देशभक्ति का धंधा" करार दिया.

उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए कहा कि वह हमेशा ऐसे मैचों के खिलाफ थे. उन्होंने देश की जनता से अपील की कि वे इस मैच का बहिष्कार करें.

यह विवाद खेल और राष्ट्रीय भावनाओं के बीच एक पुरानी बहस को फिर से सामने ले आया है. सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों और प्रतिबद्धताओं के कारण खेलना आवश्यक है. वहीं विपक्ष का मानना है कि जब सीमा पर तनाव हो और आतंकवाद की घटनाएं हो रही हों, तो पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का खेल संबंध रखना शहीदों का अपमान है. फिलहाल, मैच अपने तय समय पर होने वाला है, लेकिन इस पर राजनीतिक घमासान जारी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 13, 2025 01:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).