भारत में जर्मन चांसलर: इन मुद्दों पर बात करेंगे मैर्त्स-मोदी
12 से 13 जनवरी तक जर्मन चांसलर भारत में होंगे.
12 से 13 जनवरी तक जर्मन चांसलर भारत में होंगे. वे दिल्ली के बजाय अहमदाबाद में उतरेंगे और पीएम मोदी के साथ मुलाकात करेंगे. मैर्त्स के साथ जर्मनी का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आ रहा है.जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार, 12 जनवरी को भारत पहुंचेंगे. मैर्त्स के साथ जर्मनी की शीर्ष कंपनियों का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी होगा. जर्मनी, भारत के साथ आपसी सहयोग बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है. भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एजेंडे के मुताबिक, दोनों नेता सोमवार को साबरमती आश्रम में मिलेंगे और उसके बाद साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लेंगे. इसके बाद गांधीनगर में द्विपक्षीय वार्ताएं होंगी.
13 जनवरी को मैर्त्स, बेंगलुरु में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस में छात्रों से मिलेंगे और एक जर्मन कंपनी के ऑफिस में जाएंगे. जर्मन चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के विदेश व्यापार प्रमुख फोल्कर ट्रीयर के मुताबिक, करीब 2,000 जर्मन कंपनियों ने भारत में निवेश किया हुआ है, जिनमें करीब 5 लाख लोग काम कर रहे हैं.
भारत है एक अहम साझेदार
जर्मन न्यूज एजेंसी डीपीए से बात करते हुए ट्रीयर ने कहा,"आर्थिक गतिशीलता, युवा आबादी और बढ़ते औद्योगिक आधार को देखते हुए, भारत हमारी कंपनियों के लिए तेजी से अहम होता जा रहा है- खासकर सप्लाई चेन में विविधता लाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने लिए मौके बनाने के नजरिए से." हालांकि, ट्रीयर ने कहा कि अपने विशाल आकार के बावजूद, भारत फिलहाल जर्मनी के व्यापारिक साझेदारों में 23वें नंबर पर आता है, जबकि ईयू में भारत के व्यापारिक साझेदार देखे जाएं तो जर्मनी पहले स्थान पर है.
चीन में घटती बिक्री के बीच जर्मन कार कंपनियों की भारत से बढ़ी उम्मीदें
2024 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 31 अरब यूरो रहा और इसमें जर्मनी को हल्की बढ़त हासिल है. लेकिन जब चीन के साथ तुलना की जाए तो आंकड़ा बहुत छोटा नजर आता है. 2024 में जर्मनी और चीन के बीच लगभग 246 अरब यूरो का व्यापार हुआ. ट्रीयर मानते हैं, "भारत, जर्मन अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्व रखता है, खासकर रणनीतिक नजरिए से." ट्रीयर के मुताबिक, जर्मन कंपनियों की मैकेनिकल इंजीनियरिंग, वाहन उद्योग और केमिकल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पहले से ही मजबूत पकड़ है.
जर्मनी को नए साझीदारों की तलाश
पिछले साल विदेश मंत्रालय में जर्मन राजदूतों को दिए गए एक भाषण में मैर्त्स ने नई वैश्विक राजनीतिक स्थिति पर एक जरूरी टिप्पणी की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों का सीधा जिक्र किए बिना उन्होंने कहा था,"जिसे हम उदार वैश्विक व्यवस्था कहते थे, वह अब कई तरफ से दबाव में है. पश्चिमी राजनीति के भीतर से भी." मैर्त्स ने कहा था कि विश्व व्यापार संगठन अब प्रभावी नहीं रह गया. ऐसे में जर्मनी और यूरोपीय देशों को अब खुद नियम-आधारित व्यापार की एक नई व्यवस्था बनानी होगी. और, इसे हासिल करने के लिए, जर्मनी को भारत जैसे बड़े देशों के साथ ज्यादा और बेहतर साझेदारी की जरूरत है.
व्यापार और प्रवासन हैं मुख्य बिंदु: जर्मन राजदूत
इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में, भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप आकरमान कहते हैं कि चांसलर मैर्त्स के इस दौरे में दोनों देशों के बीच कारोबार और अपेक्षाकृत संतुलित व्यापार के साथ-साथ प्रवासन दूसरा अहम विषय होगा. आकरमान ने कहा,"जर्मनी में भारतीय कामगार अपने जर्मन कामगारों की तुलना में औसतन 20% ज्यादा कमाते हैं. यह इस बात का शानदार प्रमाण है कि यह प्रवासन साझेदारी कितनी अच्छी तरह काम करती है." उन्होंने जोड़ा, "यह बात कि 25 शीर्ष सीईओ चांसलर के साथ आ रहे हैं, इस बात का साफ संकेत है कि जर्मन बिजनेस कम्युनिटी में भारत को एक संभावित और भविष्य के बाजार के रूप में कितनी गंभीरता से लिया जाता है."
जर्मनी में नौकरी और कारोबार पर आकरमान ने कहा,"जर्मनी में हमारे पास ऐसे क्षेत्र हैं जहां हमें कुशल कामगारों की तत्काल जरूरत है. जैसे कि नर्सिंग, देखभाल और दस्तकारी में. वहां पर्याप्त युवा लोग नहीं हैं, और हमें लगता है कि जब जर्मनी जाने की बात आती है तो भारत में बहुत इच्छाशक्ति, तैयारी और खुलापन है." जानकार मानते हैं कि दोनों देश मिलकर ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे का विकास, कुशल कामगारों के प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के मामलों पर आपसी सहयोग कहीं ज्यादा बेहतर सकते हैं.
सैन्य निर्यात बढ़ाना चाहता है जर्मनी
भारत और रूस के बीच दशकों से करीबी रक्षा संबंध रहे हैं. भारत अपनी आजादी के बाद से ही रूस के हथियारों का इस्तेमाल करता आया है. रूस के बाद रफाएल जहाज निर्यात करने वाले फ्रांस का नंबर है. वहीं जर्मनी निर्यातकों की सूची में काफी नीचे है. भारत अपने सशस्त्र बलों को आधुनिक बनाने पर खर्च कर रहा है. जर्मनी को उम्मीद है कि उन्हें भारत से एयरबस ए400एम मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान और जर्मन पनडुब्बियों के ऑर्डर मिलेंगे. हालांकि, जर्मन राजदूत आकरमान के मुताबिक, इस दौरे में रक्षा से जुड़े मामलों पर कम बात होगी क्योंकि उन समझौतों पर अभी वार्ताएं जारी हैं.