केरल के पूर्व मुख्यमंत्री V S Achuthanandan का निधन; 101 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

केरल की राजनीति और भारत की कम्युनिस्ट विचारधारा का एक अहम स्तंभ रहे वी एस अच्युतानंदन (V S Achuthanandan) का 21 जुलाई 2025 को निधन हो गया. 101 वर्षीय अच्युतानंदन पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक जीवन से दूर थे और अपने बेटे अरुण कुमार के तिरुवनंतपुरम स्थित निवास पर रहते थे.

केरल की राजनीति और भारत की कम्युनिस्ट विचारधारा का एक अहम स्तंभ रहे वी एस अच्युतानंदन (V S Achuthanandan) का 21 जुलाई 2025 को निधन हो गया. 101 वर्षीय अच्युतानंदन पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक जीवन से दूर थे और अपने बेटे अरुण कुमार के तिरुवनंतपुरम स्थित निवास पर रहते थे. उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था. वी एस अच्युतानंदन ने महज 16 साल की उम्र में राजनीति की राह पकड़ ली थी. उन्होंने औपनिवेशिक शासन और जमींदारों के खिलाफ आवाज़ उठाई और खेतिहर मजदूरों को संगठित किया. 1946 में पनपरा-वायलार आंदोलन में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही, जिसके दौरान उन्हें पुलिस हिरासत में पीटा गया और गंभीर रूप से घायल किया गया.

आदर्शों से कभी नहीं डिगे

वामपंथी विचारधारा के सच्चे सिपाही अच्युतानंदन ने 1964 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के गठन में भाग लिया. वे न सिर्फ पार्टी के राज्य सचिव बने, बल्कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए भी पार्टी लाइन से हटकर कई जनहित के मुद्दों पर आवाज़ उठाई. चाहे पर्यावरण संरक्षण हो या ट्रांसजेंडर अधिकार, उन्होंने हमेशा कमजोरों की तरफदारी की.

राजनीति में बागी तेवर, फिर भी जनता के चहेते

2009 में उन्हें पार्टी की पोलित ब्यूरो से हटाया गया, पर जनता के बीच उनका आकर्षण बना रहा. 2012 में उन्होंने पार्टी के आदेश के खिलाफ जाकर आरएमपी नेता टी.पी. चंद्रशेखरन की पत्नी के.के. रेमा से मुलाकात की. यह कदम उनके बागी स्वभाव को दर्शाता है.

संघर्षों से बना व्यक्तित्व

गरीबी में पले-बढ़े अच्युतानंदन का बचपन बेहद कठिन था. उन्होंने कभी मंदिर के तालाब में कपड़े धोकर सुखाए तो कभी पुजारी से बचा-खुचा प्रसाद खाकर दिन बिताए. एक समय वे दर्जी का काम भी कर चुके थे. इन कठिनाइयों ने ही उन्हें जमीनी राजनीति का योद्धा बनाया.

विचारधारा से गहरा जुड़ाव

मुख्यमंत्री रहते हुए जब एक छात्र ने उनसे उनके पसंदीदा देवता के बारे में पूछा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "कहानियों में तो सब देवता आकर्षक लगते हैं, पर क्या वे सच में हैं, ये तो कोई नहीं जानता."

एक युग का अंत

वी.एस. अच्युतानंदन अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके संघर्ष, और उनके आदर्श सदैव प्रेरणा देते रहेंगे. वे ऐसे नेता थे जिन्होंने नारे नहीं, कार्यों से अपनी विचारधारा को जीवंत किया. उनके परिवार में पत्नी वासुमती, बेटी वी.वी. आशा और बेटा वी.ए. अरुण कुमार सहित नाती-पोते हैं.

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