हैदराबाद, तेलंगाना: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया उर्दू भाषा पर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी ने कहा कि "यह स्पष्ट है कि यूपी मुख्यमंत्री उर्दू नहीं जानते. लेकिन केवल वही जवाब दे सकते हैं कि वे वैज्ञानिक क्यों नहीं बने."
ओवैसी ने आगे कहा, "जिस विचारधारा से यूपी मुख्यमंत्री आते हैं, उस विचारधारा से इस देश के स्वतंत्रता संग्राम में कोई भी हिस्सा नहीं लिया था. वह गोरखपुर से आते हैं. रघुपति सहाय 'फिराक' भी उसी गोरखपुर से थे. वह एक प्रसिद्ध उर्दू कवि थे, लेकिन वे मुसलमान नहीं थे." ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ के बयान को उनकी बौद्धिक क्षमता का परिणाम करार दिया और उन पर तीखा हमला किया.
यह बयान योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा में उर्दू भाषा पर की गई टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने उर्दू को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी. ओवैसी ने इस टिप्पणी को न केवल ग़लत बताया, बल्कि यह भी कहा कि यह बयान देश की सांस्कृतिक धरोहर और विविधता को नकारने का प्रतीक है.
#WATCH | Hyderabad, Telangana: AIMIM chief Asaduddin Owaisi speaks on UP CM Yogi Adityanath's recent remark in the State Assembly on Urdu language.
He says, "...It is clear that UP CM doesn't know Urdu. But only he can answer why he did not become a scientist...The ideology that… pic.twitter.com/VsByoHNlMr
— ANI (@ANI) March 1, 2025
ओवैसी का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उर्दू भाषा भारतीय उपमहाद्वीप की एक अहम सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर मानी जाती है. उर्दू के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों पर हमेशा विवाद उठते रहे हैं, और यह विवाद अब एक बार फिर नए सिरे से चर्चा में आया है.
ओवैसी का कहना था कि जो लोग उर्दू का अपमान करते हैं, वे न केवल एक भाषा का बल्कि पूरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलू का अपमान कर रहे हैं. उनका यह बयान सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, जो भारतीय राजनीति में उर्दू भाषा और इसके महत्व को लेकर और भी सवाल खड़े करता है.













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