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किशोरों के रोमांटिक मामलों को सुलझाने के लिए नहीं हैं POCSO - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग माता और पिता को किया रिहा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम किशोरों के रोमांटिक मामलों को सुलझाने के लिए नहीं है. अदालत ने एक पॉक्सो आरोपी युवक को जमानत दे दी, जो 14 साल की लड़की के साथ भाग गया और उसके साथ एक मंदिर में शादी कर ली थी.

किशोरों के रोमांटिक मामलों को सुलझाने के लिए नहीं हैं POCSO - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग माता और पिता को किया रिहा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम किशोरों के रोमांटिक मामलों को सुलझाने के लिए नहीं है. अदालत ने एक पॉक्सो आरोपी युवक को जमानत दे दी, जो 14 साल की लड़की के साथ भाग गया और उसके साथ एक मंदिर में शादी कर ली थी. ये युवक जो पहले नाबालिग था, दो साल तक लड़की के साथ रहा, इस दौरान लड़की ने एक बच्चे को जन्म दिया. लड़का ब्राह्मण है जबकि लड़की दलित है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया

अतुल मिश्रा की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति राहुल चतुवेर्दी ने कहा कि बढ़ती घटनाएं जहां किशोर और युवा वयस्क पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों का शिकार होते हैं. अधिनियम की गंभीरता, एक ऐसा मुद्दा है जो इस अदालत की अंतरात्मा के लिए बहुत चिंता का विषय है.

उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद -15 के अनुसार, बच्चे को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराधों से बचाना, 1950 और बच्चों के अधिकारों का संरक्षण (पोक्सो) है. हालाँकि, समस्या अधिनियम के तहत दायर मामलों की एक बड़ी श्रृंखला किशोरों और किशोरों के परिवारों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों / प्राथमिकी के आधार पर उत्पन्न होती है, जो प्रेम संबंधों के तहत दर्ज कराई जाती हैं.

याचिकाकर्ता को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि नि:संदेह नाबालिग लड़की की सहमति का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं है, लेकिन वर्तमान परि²श्य में जहां लड़की ने बच्चे को जन्म दिया है और उसके पहले के बयान में उसने अपने माता-पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया है और पिछले चार से पांच महीनों से राजकीय बालगृह (बालिका) खुल्दाबाद, प्रयागराज में अपने नवजात बच्चे के साथ सबसे अमानवीय स्थिति में रह रही है, यह अपने आप में दयनीय है.

राजकीय बालगृह (बालिका), खुल्दाबाद, प्रयागराज के प्रभारी को पीड़ित लड़की को उसके बच्चे के साथ रिहा करने का निर्देश देते हुए, अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चे को माता-पिता के प्यार और स्नेह से वंचित करना बेहद कठोर और अमानवीय होगा. तथ्य यह है कि आरोपी और नाबालिग पीड़ित दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे और शादी करने का फैसला किया था.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 18, 2022 12:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).