One Nation One Election: व्हिप के बावजूद 20 से ज्यादा सांसद रहे अनुपस्थित, BJP ने भेजा नोटिस
लोकसभा में मंगलवार को 'वन नेशन-वन इलेक्शन' बिल पेश किया गया. इस मौके पर सदन में अनुपस्थित रहने वाले बीजेपी सांसदों को पार्टी ने नोटिस भेजा है. बीजेपी के जो सांसद मंगलवार को 'एक देश एक चुनाव' बिल के समय मौजूद नहीं थे,
नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को 'वन नेशन-वन इलेक्शन' बिल पेश किया गया. इस मौके पर सदन में अनुपस्थित रहने वाले बीजेपी सांसदों को पार्टी ने नोटिस भेजा है. बीजेपी के जो सांसद मंगलवार को 'एक देश एक चुनाव' बिल के समय मौजूद नहीं थे, पार्टी ने उनको नोटिस भेजा है. दरअसल संसद में आज 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल पर चर्चा और वोटिंग हुई. यह विधेयक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान संशोधन का प्रस्ताव है.
बीजेपी ने इस महत्वपूर्ण मौके पर अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया था. लेकिन इसके बावजूद 20 से अधिक बीजेपी सांसद वोटिंग के समय अनुपस्थित रहे, जिससे पार्टी नाराज है. इस अहम मौके पर 20 से ज्यादा बीजेपी सांसदों की अनुपस्थिति के कारण पार्टी के वोट कुछ कम हुए. बीजेपी ने अपने कई सांसदों को नोटिस भेज दिया है और अन्य को भी नोटिस भेजे जाने हैं.
किन्हें भेजा गया नोटिस?
अनुपस्थित सांसदों में कई प्रमुख नाम सामने आए हैं, जैसे:
- जगदंबिका पाल
- शांतनु ठाकुर
- गिरीराज सिंह
- ज्योतिरादित्य सिंधिया
- जगन्नाथ सरकार
- उदयराजे भोंसले
- विजय बघेल
- बीएस राघवेंद्र
बिल के पक्ष में पड़े 269 वोट
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया. बिल पेश करने के दौरान सदन में तीखी बहस हुई, और विपक्ष ने इसे लेकर जमकर विरोध किया. चर्चा के बाद जब मतदान हुआ, तो विधेयक के पक्ष में 269 वोट और विपक्ष में 198 वोट पड़े. बिल को अंततः संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया.
वन नेशन, वन इलेक्शन पर राजनीतिक मतभेद
'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तीखे मतभेद नजर आए. बीजेपी और उसके सहयोगी दल जैसे शिवसेना और टीडीपी ने इसका समर्थन किया. विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, और तृणमूल कांग्रेस ने इसे संविधान की बुनियादी संरचना के खिलाफ बताया.
कांग्रेस ने इसे फेडरल स्ट्रक्चर पर हमला बताया. वहीं समाजवादी पार्टी आरोप लगाया कि यह कदम लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है. डीएमके ने इसे राज्यों के अधिकारों का हनन करार दिया.