दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता के बीच केंद्र सरकार के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है. सरकार ने संसद को बताया है कि फिलहाल ऐसा कोई “ठोस या निर्णायक सबूत” नहीं है, जिससे यह सीधे तौर पर साबित हो सके कि ज्यादा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) फेफड़ों की बीमारियों का सीधा कारण है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से यह जवाब तब दिया गया, जब संसद में इंडो-गंगा क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और उससे होने वाली बीमारियों को लेकर सवाल उठाए गए.
सरकार का कहना है कि वायु प्रदूषण सांस से जुड़ी समस्याओं को जरूर बढ़ाता है, लेकिन इसे अस्थमा, सीओपीडी या फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों का एकमात्र या मुख्य कारण नहीं माना जा सकता. मंत्रालय के अनुसार फेफड़ों की बीमारियां कई कारणों से होती हैं और सिर्फ AQI को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा.
फेफड़ों की बीमारियां क्यों होती हैं? सरकार का तर्क
सरकार ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां बहु-कारक होती हैं. इनमें आनुवंशिक कारण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पोषण की कमी, धूम्रपान, और कामकाजी माहौल में धूल या रसायनों के संपर्क जैसे कई तत्व शामिल होते हैं. मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत के संदर्भ में लंबे समय तक किए गए बड़े वैज्ञानिक अध्ययन (लॉन्ग टर्म स्टडीज़) की कमी के कारण AQI और फेफड़ों की बीमारी के बीच सीधा संबंध स्थापित करना मुश्किल है.
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें कहती हैं कुछ और
हालांकि सरकार का यह रुख कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रिपोर्टों से अलग नजर आता है. World Health Organization (WHO) और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज जैसी रिपोर्टों में वायु प्रदूषण को भारत में समय से पहले होने वाली मौतों का बड़ा कारण बताया गया है.
खासतौर पर पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों को सांस के जरिए शरीर में जाने से गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला माना गया है. कई चिकित्सा संगठनों का कहना है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में “सीवियर” AQI स्तर रोजाना कई सिगरेट पीने के बराबर असर डालता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है.
सरकार ने क्या कदम गिनाए?
संसद में जवाब देते हुए सरकार ने यह भी कहा कि वह खराब हवा के असर को कम करने के लिए कदम उठा रही है. सरकार ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है. सरकार का जोर इस बात पर रहा कि प्रदूषण को “बीमारी बढ़ाने वाला कारण” माना जाए, न कि सीधा “बीमारी पैदा करने वाला”.













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