सात महीनों बाद जेल से बाहर आएंगे न्यूजक्लिक के संपादक
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली की एक निचली अदालत ने न्यूजक्लिक के संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को जमानत दे दी है. जानिए किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पुरकायस्थ की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए.बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने पुरकायस्थ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने से पहले रिमांड एप्लीकेशन की प्रति पुरकायस्थ को या उनके वकील को देनी चाहिए थी और उन्हें यह बताना चाहिए था कि उन्हें गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है.

चूंकि पुलिस ने ऐसा नहीं किया, अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को अमान्य ठहराया. अदालत ने यह भी कहा कि चार्जशीट दायर नहीं हुई तो अदालत पुरकायस्थ को तुरंत रिहा करने का आदेश दे देती, लेकिन क्योंकि चार्जशीट दायर हो चुकी है, उन्हें एक लाख का जमानती बॉन्ड भरने के लिए कहा गया.

गिरफ्तारी की प्रक्रिया का उल्लंघन

बांड भरने के बाद दिल्ली की एक निचली अदालत ने पुरकायस्थ को जमानत दे दी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान पुरकायस्थ पर लगे आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन इस फैसले को पुलिस द्वारा मनमानी गिरफ्तारी पर अंकुश के रूप में देखा जा रहा है.

पुरकायस्था को तीन अक्तूबर, 2023 को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ यूएपीए की धाराएं लगाई गई थीं. गिरफ्तारी से पहले उनके संस्थान न्यूजक्लिक के दफ्तर और कई कर्मचारियों के घरों पर छापे मारे गए थे.

न्यूजक्लिक से जुड़े पत्रकारों के दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में 50 ठिकानों की तलाशी ली गई थी और उनके डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए गए थे. पुलिस ने कहा था कि कुल 46 "संदिग्धों" से पूछताछ की गई थी.

आरोप यह था कि न्यूजक्लिक ने चीन का प्रोपेगंडा करने वाले एक व्यक्ति से करोड़ों रुपए लिए हैं और चीन का प्रोपेगंडा किया है. अगस्त 2023 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया था कि अमेरिकी अरबपति नेविल रॉय सिंघम ने "चीनी प्रोपेगेंडा" फैलाने के लिए कई संगठनों को पैसे दिए थे और इन संगठनों में न्यूजक्लिक भी शामिल है.

न्यूजक्लिक के खिलाफ फरवरी, 2021 में भी ईडी ने छापे मारे थे. वेबसाइट से जुड़े स्थानों पर मारे गए यह छापे पांच दिनों तक चले थे. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने अगस्त 2020 में वेबसाइट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

फंडिंग पर जांच एजेंसियों की नजर

इस एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि वेबसाइट को वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी नाम की अमेरिकी कंपनी से 9.59 करोड़ रुपये एफडीआई मिली थी, जिसके लिए कंपनी के शेयरों के दामों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया था ताकि भारतीय मीडिया संस्थानों में 26 प्रतिशत एफडीआई की ऊपर सीमा से बचा जा सके.

वेबसाइट का कहना है कि आरबीआई इस निवेश की जांच कर कह चुका है कि इसमें कोई अनियमितता नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने 2021 में ही दावा किया था कि न्यूजक्लिक को मिली कुल 30 करोड़ रुपयों की फंडिंग एजेंसियों की जांच के दायरे में है.

पुरकायस्था के अलावा न्यूजक्लिक के एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती को भी गिरफ्तार किया गया था. चक्रवर्ती बाद में अप्रूवर बन गए थे, जिसके बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था. पुरकायस्था को एक ट्रायल कोर्ट ने पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए थे. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ही यह सबाल उठाया था कि रिमांड पर सुनवाई भी क्यों पुरकायस्था के वकील की गैर मौजूदगी में की गई थी. 30 अप्रैल को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.