Nashik GMC Lift Tragedy: महाराष्ट्र के नासिक स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी. अस्पताल की एक महिला कर्मचारी की लिफ्ट के नीचे दबने से दर्दनाक मौत हो गई. हलांकि मौत की अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना सुबह करीब 9:00 बजे उस समय हुई जब अस्पताल में नियमित कामकाज चल रहा था. इस पूरी घटना का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने सुरक्षा मानकों और रखरखाव को लेकर बहस छेड़ दी है.
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
27 अप्रैल की सुबह, महिला कर्मचारी अपने काम के दौरान उपकरण ले जाने वाली लिफ्ट (Hoist Lift) के पास मौजूद थी. सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, लिफ्ट में कुछ तकनीकी खराबी आने के कारण वह रुकी हुई थी. महिला यह देखने के लिए लिफ्ट के शाफ्ट (खाली जगह) की ओर झुकी कि लिफ्ट कहां रुकी है. उसी पल लिफ्ट अचानक तेजी से नीचे गिर गई, जिससे महिला का सिर और गर्दन लिफ्ट और दीवार के बीच बुरी तरह दब गए. यह भी पढ़े: Malegaon Municipal Lift Collapse: मालेगांव में बड़ा हादसा टला, मेयर चुनाव के बाद नेताओं-पत्रकारों से भारी महानगरपालिका की लिफ्ट गिरी, सभी बाल-बाल बचे, देखें VIDEO
लिफ्ट हादसे में महिला कर्मचारी की मौत
Tragedy at Nashik Govt Medical College. 🏥
A staffer lost her life after a lift collapsed during her shift. The horrific accident was caught on CCTV. Heartbreaking day for health workers. 💔 pic.twitter.com/rESeCgtfFx
— Godman Chikna (@Madan_Chikna) April 27, 2026
सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर सवाल
वीडियो में देखा गया कि महिला ने मदद के लिए हाथ-पैर हिलाकर संकेत देने की कोशिश की, लेकिन गर्दन दबी होने के कारण वह चिल्लाने में असमर्थ थी. मौके पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन चोट इतनी गंभीर थी कि उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. इस घटना ने मेडिकल कॉलेज में 'डेडली नेग्लिजेंस' (घातक लापरवाही) की ओर इशारा किया है. जानकारों का कहना है कि लिफ्ट में अवरोध पहचानने वाले सेंसर (Obstruction Sensors) और सेकेंडरी ब्रेकिंग सिस्टम की कमी थी.
रखरखाव और जवाबदेही की जांच
अस्पताल जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर मशीनों का नियमित निरीक्षण अनिवार्य है. अब जांच इस बात पर टिकी है कि क्या यह हादसा किसी अचानक तकनीकी खराबी के कारण हुआ या फिर इंजीनियरिंग विभाग की लंबे समय से चली आ रही अनदेखी का नतीजा है. सरकारी अस्पतालों में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अब स्थानीय प्रशासन और सरकार से जवाबदेही की मांग की जा रही है.
कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन
इस हादसे ने सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल पर मौजूद खतरों को उजागर किया है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों को तकनीकी समस्याओं से खुद निपटने के बजाय सुरक्षित प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए. अस्पताल प्रशासन पर अब यह दबाव है कि वे सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत अपडेट करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.













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