Muzaffarpur Shocker: हद है... जिंदा पिता को 'मरा' बताकर बेटे ने बेच दी पुश्तैनी जमीन, रजिस्ट्री ऑफिस ने नहीं की कोई जांच
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Muzaffarpur Land Sale by Showing Father as Dead: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 90 वर्षीय बुज़ुर्ग अपने ही बेटे की धोखाधड़ी का शिकार हो गए. लाठी के सहारे चलने वाले राज नारायण ठाकुर नाम के बुज़ुर्ग शनिवार को इंसाफ की आस में जिला अधिकारी के दरवाजे पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके पांचवें बेटे दिलीप ठाकुर ने उन्हें कागजों में ‘मृत’ दिखाकर पुश्तैनी जमीन को सिर्फ 2 लाख रुपये में बेच डाला. राज नारायण ठाकुर ने बताया कि उनके गांव महमदपुर की पुश्तैनी जमीन अब तक उनके और उनके दो भाइयों रामजिनिश और रामपुकार के बीच कानूनी रूप से बंटी नहीं है.

जमीन आज भी उनके पिता, स्वर्गीय मेथुरा ठाकुर के नाम पर दर्ज है. परिवार में सिर्फ मौखिक रूप से बंटवारे की बात हुई थी, लेकिन किसी तरह की सीमांकन या रजिस्ट्री नहीं हुई.

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रजिस्ट्री ऑफिस ने नहीं की जमीन की जांच

इसके बावजूद उनके बेटे दिलीप ठाकुर ने बिना उनकी जानकारी और मर्जी के जमीन को बेच दिया. जब राज नारायण को इसकी भनक लगी तो उन्होंने रजिस्ट्री ऑफिस से दस्तावेज़ निकाले. वहां उन्होंने देखा कि जमीन की बिक्री के रजिस्ट्री पेपर में उन्हें ‘मृतक’ बताया गया है.

राज नारायण ठाकुर ने शिकायत में यह भी कहा कि मोतीपुर रजिस्ट्री ऑफिस ने न तो जमीन का कोई फिजिकल वेरिफिकेशन किया और न ही इस बात की पुष्टि कि वे जीवित हैं या नहीं. बिना उनकी जानकारी और सहमति के दिलीप ठाकुर ने सुमन सौरभ नाम के व्यक्ति को ज़मीन बेच दी.

बेटे की आदतें भी जिम्मेदार

राज नारायण ठाकुर ने आरोप लगाया कि उनका बेटा दिलीप शराब की लत में डूबा हुआ है और पहले भी कई संपत्तियां नशे की हालत में बेच चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि अब कोई भी परिवार का सदस्य उनकी सुध नहीं लेता. खाने और कपड़े तक के लिए कोई पूछने नहीं आता.

राज नारायण ठाकुर ने प्रशासन से दो मुख्य मांगे रखी हैं. पहली, इस फर्जी रजिस्ट्री की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और दूसरी, जमीन की रजिस्ट्री को तुरंत रद्द या फ्रीज किया जाए.

जिला अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

इस पूरे मामले को सुनने के बाद मुज़फ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं. सर्किल अधिकारी और थाना प्रभारी को केस की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.

अब देखना होगा कि 90 साल की उम्र में इंसाफ की आस लिए घूम रहे इस बुज़ुर्ग को न्याय मिल पाता है या नहीं.