Haji Ali Dargah: एकता और देशभक्ति का संदेश, हाजी अली दरगाह पर लगेगा दुनिया का सबसे ऊंचा तिरंगा? ट्रस्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भेजा प्रस्ताव
मुंबई की ऐतिहासिक हाजी अली दरगाह के पास दुनिया का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित करने की योजना बनाई गई है. दरगाह ट्रस्ट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए महाराष्ट्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है.
Haji Ali Dargah: मुंबई की पहचान मानी जाने वाली हाजी अली दरगाह जल्द ही एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है. दरगाह ट्रस्ट ने समुद्र के बीच स्थित इस पवित्र स्थल के पास दुनिया का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) फहराने का प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार को सौंपा है. रविवार, 8 मार्च 2026 को रमजान के पवित्र महीने के दौरान आयोजित एक विशेष 'सेहरी' कार्यक्रम में इस योजना की आधिकारिक घोषणा की गई. इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारत की साझा पहचान को दुनिया के सामने प्रदर्शित करना है.
देशभक्ति और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक
हाजी अली दरगाह और माहिम मखदूम शाह बाबा दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने बताया कि यह ध्वज न केवल एक संरचना होगी, बल्कि यह भारत के समावेशी इतिहास और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बनेगा. सेहरी कार्यक्रम में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी, सिख और बौद्ध धर्मगुरुओं की उपस्थिति ने इस संदेश को और मजबूती दी. खंडवानी के अनुसार, यह छोटा सा टापू अब दुनिया के सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज की मेजबानी करने के लिए तैयार है.
समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष तकनीक
चूंकि हाजी अली दरगाह समुद्र के बीच एक टापू पर स्थित है, इसलिए इस ध्वज स्तंभ का निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा. ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि:
- मजबूत आधार: खंभे को स्थिरता देने के लिए विशेष 'पाइलिंग' (Piling) तकनीक का उपयोग किया जाएगा.
- उच्च गुणवत्ता वाली धातु: खारे पानी और समुद्री हवाओं से बचाव के लिए उत्तम दर्जे की धातु का इस्तेमाल होगा.
- विशेष कपड़ा: झंडे के लिए ऐसा कपड़ा तैयार किया जाएगा जो तेज समुद्री हवाओं के बीच सुरक्षित रह सके.
हाजी अली दरगाह का इतिहास
15वीं शताब्दी के सूफी संत पीर हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह मुंबई के वरली तट से लगभग 500 मीटर दूर समुद्र में स्थित है. 1431 में निर्मित यह दरगाह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है. यहाँ हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. 2020 में इसे दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले धार्मिक स्थलों में से एक के रूप में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया था.
सरकार की मंजूरी का इंतजार
फिलहाल यह प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार के विचाराधीन है. मंजूरी मिलने के बाद, कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) और पर्यावरण विभाग से आवश्यक क्लीयरेंस लिए जाएंगे. ट्रस्ट की योजना इस ध्वज स्तंभ का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराने की है. वर्तमान में दुनिया का सबसे ऊंचा ध्वज स्तंभ मिस्र (Egypt) के काहिरा में है, जिसकी ऊंचाई लगभग 202 मीटर है. हाजी अली पर बनने वाला स्तंभ इस रिकॉर्ड को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.