Mumbai Gas Crisis: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कमर्शियल एलपीजी (LPG) गैस की भारी किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है. 'इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन' (AHAR) के अनुसार, ईंधन की कमी के कारण शहर के लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट पहले ही अपना परिचालन बंद कर चुके हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसोसिएशन ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर तत्काल समाधान की मांग की है.
72 घंटों की चेतावनी
'आहार' के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने आगाह किया है कि यदि अगले 72 घंटों के भीतर गैस की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो मुंबई के 50 प्रतिशत से अधिक रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं. इस संकट पर चर्चा करने के लिए एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल आज महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल से भी मुलाकात करेगा. यह भी पढ़े: मिडल ईस्ट तनाव के चलते भारत में LPG की किल्लत? क्या मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई में होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ेगा असर; जानें मोदी सरकार का जवाब
वैश्विक तनाव और आपूर्ति में बाधा
इस संकट का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट (अमेरिका, इजरायल और ईरान) में बढ़ता संघर्ष है. युद्ध के कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. चूंकि भारत अपनी एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, इसलिए घरेलू और कमर्शियल दोनों क्षेत्रों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है.
पेट्रोलियम मंत्री को लिखे पत्र के मुख्य अंश
'आहार' ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह संस्था लगभग 8,000 छोटे रेस्टोरेंट, परमिट रूम और होटलों का प्रतिनिधित्व करती है. पत्र में कहा गया है:
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आजीविका पर संकट: महाराष्ट्र में इस क्षेत्र से लगभग 40 लाख प्रत्यक्ष और 160 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हैं. आपूर्ति रुकने से लाखों प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है.
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राजस्व का नुकसान: होटलों की बंदी से न केवल आम जनता को किफायती भोजन मिलना बंद होगा, बल्कि सरकार के राजस्व पर भी बड़ा असर पड़ेगा.
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न्यूनतम आपूर्ति की मांग: एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि उद्योग 25 प्रतिशत तक की कटौती के साथ काम चला सकता है, लेकिन 100 प्रतिशत कटौती से संचालन असंभव हो जाएगा.
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मुंबई के होटल-रेस्टोरेंट उद्योग के सामने यह पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है. बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी लोग अपने दैनिक भोजन के लिए इन रेस्टोरेंट्स पर निर्भर हैं. 'आहार' ने सरकार से विनम्र निवेदन किया है कि आतिथ्य उद्योग (Hospitality Industry) को पीएनजी और एलपीजी की न्यूनतम मात्रा मिलती रहे, ताकि सुचारू रूप से काम चल सके और कर्मचारियों की नौकरियां सुरक्षित रहें.













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