कौन हैं Menaka Guruswamy? TMC ने SC की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा के लिए चुना, बन सकती हैं देश की पहली ‘ओपनली क्वियर’ सांसद

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया है. निर्वाचित होने पर वह भारत की पहली 'ओपनली क्वीर' सांसद बन सकती हैं.

Menaka Guruswamy (Photo Credits: X@menakaguruswamy)

Who is Menaka Guruswamy? पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. इस सूची में सबसे चर्चित नाम सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी का है. यदि वह चुनी जाती हैं, तो वह भारतीय संसद के उच्च सदन में पहुंचने वाली पहली 'ओपनली क्वीर' (Openly Queer) सदस्य बनकर इतिहास रच देंगी.

ममता बनर्जी ने की घोषणा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए चार नामों का ऐलान किया है. मेनका गुरुस्वामी के साथ ही पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार और प्रसिद्ध अभिनेत्री कोयल मल्लिक को मैदान में उतारा है. पार्टी का यह कदम कानूनी, प्रशासनिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को संसद में भेजने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.  यह भी पढ़े:  Michael Feldman: कौन हैं माइकल फेल्डमैन? नैन्सी गुथरी गुमशुदगी मामले के बीच चर्चा में आए सवाना गुथरी के पति

धारा 377 के खिलाफ कानूनी लड़ाई की नायक

मेनका गुरुस्वामी भारत की एक प्रतिष्ठित संवैधानिक वकील हैं. उन्हें विशेष रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को चुनौती देने वाली ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई के लिए जाना जाता है. उनके तर्कों के आधार पर ही 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला सुनाया था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1997 में पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के मार्गदर्शन में की थी.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

मेनका गुरुस्वामी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली है. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से बीसीएल (BCL) और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एलएलएम (LLM) की डिग्री हासिल की है.

TMC के साथ हालिया जुड़ाव

हाल के समय में मेनका गुरुस्वामी कानूनी मोर्चों पर तृणमूल कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखती नजर आई हैं. उन्होंने आई-पैक (I-PAC) कार्यालयों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के खिलाफ अदालत में टीएमसी का प्रतिनिधित्व किया था. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी विशेषज्ञता से उच्च सदन में विधायी चर्चाओं को एक नई गहराई मिलेगी.

संसद में उनकी संभावित एंट्री न केवल कानूनी जगत के लिए, बल्कि भारत के सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है.

 

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