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Punjab Assembly: पंजाब विधानसभा में भारी हंगामा; विपक्षी कांग्रेस ने की सीएम भगवंत मान समेत सभी विधायकों के डोप और अल्कोहल टेस्ट की मांग

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान पर नशे में होने के आरोपों को लेकर भारी हंगामा हुआ. कांग्रेस और अकाली दल ने सदन की गरिमा का हवाला देते हुए सभी सदस्यों के मेडिकल परीक्षण की मांग की है.

Punjab Assembly: पंजाब विधानसभा में भारी हंगामा; विपक्षी कांग्रेस ने की सीएम भगवंत मान समेत सभी विधायकों के डोप और अल्कोहल टेस्ट की मांग
सीएम भगवंत मान (Photo Credits: IANS)

चंडीगढ़, 1 मई: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Workers' Day) के अवसर पर शुक्रवार को आयोजित पंजाब विधानसभा (Punjab Legislative Assembly) के एक दिवसीय विशेष सत्र में उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी मच गई, जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) पर सदन के भीतर नशे की हालत में होने का आरोप लगाया. इन आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया. विपक्ष ने अब मुख्यमंत्री सहित सभी विधायकों के लिए 'ब्रीथ एनालाइजर' (अल्कोहल टेस्ट) और 'डोप टेस्ट' को अनिवार्य करने की मांग की है. यह भी पढ़ें: राशन पर केंद्र और पंजाब सरकार में टकराव: भगवंत मान के आरोपों पर प्रल्हाद जोशी बोले- एक भी लाभार्थी का नाम नहीं कटा

विपक्ष के गंभीर आरोप और टेस्ट की मांग

नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मांग की कि सदन की पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए सभी विधायकों का बंद कमरे में अल्कोहल टेस्ट कराया जाना चाहिए. कांग्रेस का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री का आचरण और उनकी शारीरिक स्थिति संदिग्ध थी.

वॉकआउट के बाद कई कांग्रेस विधायक विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के कार्यालय में भी दाखिल हुए और सभी विधायकों के लिए 'अल्कोमीटर' टेस्ट की मांग पर अड़े रहे. बाजवा ने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा कि यदि इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो जनता का इस सम्मानित संस्थान से भरोसा उठ जाएगा.

सत्ता पक्ष की सफाई: आरोपों को बताया झूठा

दूसरी ओर, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और झूठे हैं. चीमा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर हाल ही में पंचायत भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप लगे हैं, जिससे ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष इस तरह के हथकंडे अपना रहा है.

अकाली दल और बीजेपी का हमला

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस घटना की कड़ी निंदा की.  अकाली दल ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री 'मजदूर दिवस' जैसे पवित्र अवसर पर इस तरह के आचरण के साथ सदन में आए. पार्टी ने मुख्यमंत्री के डोप टेस्ट की मांग का समर्थन किया.

वहीं, बीजेपी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन की गरिमा और मुख्यमंत्री के पद का ऐसा अपमान पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि पंजाब इस तरह से नहीं चल सकता.

सदन की कार्यवाही में बाधा

हंगामे के दौरान सदन में कई बार तीखी नोकझोंक देखी गई, जिसके कारण स्पीकर को मर्यादा बनाए रखने के लिए बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा के आचरण पर आपत्ति जताई, जिससे विवाद और बढ़ गया. फिलहाल, पंजाब की राजनीति में इस घटनाक्रम ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 01, 2026 04:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).