बिहार में शराबबंदी के बीच बढ़ता सूखे नशे का जाल
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बिहार में अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से शराब के विकल्प के तौर पर सूखे नशे (साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) का जाल और फैलता ही चला गया है. युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं और यह एक बड़ा कारोबार बन गया है.बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और है. शराब की तस्करी तो होती ही रही, देसी शराब भी बनाई जाती रही. इसलिए समय-समय पर जहरीली शराब से मौत के मामले भी सामने आते रहते हैं. वहीं, सूखे नशे का चलन भी बढ़ता जा रहा है. शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस बड़ी मात्रा में गांजा, स्मैक, ब्राउन शुगर, अफीम, चरस और हेरोइन बरामद करती रही है. इतना ही नहीं, नशे के इंजेक्शन लेने वाले कई लोग एड्स के भी शिकार हो रहे हैं.

राज्य में एनडीए की नई सरकार के मुखिया सम्राट चौधरी ने भी शराबबंदी को लागू रखने की दृढ़ इच्छाशक्ति व्यक्त की है. किंतु, इसमें भी कोई दो राय नहीं कि शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू रखना और सूखे नशे के धंधे पर नकेल कसना, दोनों ही सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं. राज्य में पक्ष-विपक्ष के विधायक भी इसे लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं.

भारत-नेपाल व बंगाल सीमा से सटे बिहार के सीमांचल का किशनगंज जिला ही ड्रग्स तस्करी की भयावहता समझने को काफी है. इस साल जनवरी से बीते 15 अप्रैल तक भारी मात्रा में गांजा, ब्राउन शुगर, स्मैक और मार्फिन (नशीली टैबलेट) बरामद की गई. 20 मामले दर्ज किए गए और 30 तस्करों को गिरफ्तार किया गया. इस अवधि में 404 किलो गांजा, 304 ग्राम ब्राउन शुगर, 133 ग्राम स्मैक और 808 ग्राम मार्फिन जब्त की गई है. अधिकारियों के अनुसार, ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को और तेज किया जा रहा है.

पुलिस मुख्यालय के आंकड़े भी दिखा रहे हैं कि 2023 से फरवरी 2026 तक केवल पटना जिले में 137 किलोग्राम से अधिक स्मैक, हेरोइन और ब्राउन शुगर की बरामदगी हुई. इससे कई गुना अधिक गांजा, कोडीनयुक्त कफ सिरप और चरस पकड़े गए. गया जिले में तो कई बार अफीम की खड़ी फसल भी उजाड़ी जा चुकी है. इसी क्रम में भारत-नेपाल सीमा पर जाली करेंसी, मानव व मादक पदार्थों की तस्करी तथा अवैध आवाजाही को रोकने के लिए बिहार पुलिस की चार नई स्पेशल यूनिट तैनात की गई है. साथ ही, स्पेशल टास्क फोर्स की ड्रोन सेल ने एरियल सर्विलांस और ड्रोन मैपिंग से नौ जिलों में 423 किलोमीटर का सर्वे कर 63 एकड़ में अफीम की खेती को नष्ट किया है.

सिंडिकेट सक्रिय, नॉर्थ ईस्ट-नेपाल से आ रहा ड्रग्स

सीमांचल के इलाके में तैनात रहे एक पुलिस अधिकारी नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कहते हैं, "इस खेल में पूरा सिंडिकेट सक्रिय तो रहता ही है, भ्रष्ट अधिकारियों का भी उन्हें भरपूर समर्थन रहता है. शराब को ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन सूखे नशे की ट्रांसपोर्टिंग आसान है. पहले इसकी बड़ी खेप को किसी शहर या उसके आसपास डंप किया जाता है और फिर वहां से अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय सप्लायर तक पहुंचाया जाता है."

इसकी पूरी सप्लाई चेन बनी हुई है. नेपाल व नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से सप्लाई के कारण ही सीमांचल के इलाके इससे ज्यादा प्रभावित हैं. कुछ दिन पहले भी पटना पुलिस की एक कार्रवाई में करीब पांच किलो हेरोइन और स्मैक के साथ दो लोग पकड़े गए थे. इन्होंने पूछताछ में बताया था कि मुख्य सप्लायर नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में बैठा है. वहां से ट्रेन के जरिए इसे पटना लाया गया था. वे कहते हैं, "इसके कैरियर को केवल इतना ही पता होता है कि उसके पास एक पैकेट है, जिसे किसी छोटे स्टेशन या आउटर पर उतर कर किसी को सौंप देना है. रिसीव करने वाला उस कोड बताता है. ऐसा नहीं है कि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, किंतु मास्टरमाइंड के पकड़ से बाहर रहने के कारण धंधा बदस्तूर चालू रहता है."

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सामाजिक कार्यकर्ता रमेश गोस्वामी कहते हैं, "इस संबंध में तो पूछिए ही मत. शुरू में जब शराबबंदी कानून लागू हुआ था तो काफी कुछ बदला हुआ दिखता था. समय बीतने के साथ सब कुछ सतह पर आ गया. इसकी परवरिश तो बस भ्रष्टाचार ही कर रहा है. स्कूल-कॉलेज व कोचिंग संस्थानों के आसपास या मोहल्ले में कहां गांजा-चरस बिक रहा है, पुलिस को सब पता होता है. ऐसे ही एक थानेदार-एसडीपीओ के पास करोड़ों नहीं आ गए. खैर..." बिहार के सीमांचल का इलाका नशे के धंधेबाजों के लिए चारागाह बन गया है. युवा गलत संगत में या फिर शौक के तौर पर पहली बार सोचकर इसका इस्तेमाल करते हैं और फिर इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं. वहीं कभी-कभी उन्हें मुफ्त में नशा कराकर लत भी लगाई जाती है. ऐसा खासकर कम उम्र के लोगों के साथ किया जाता है. पैसों के लालच और लत के चक्कर में ये युवा तस्करी के काम से जुड़ जाते हैं.

शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में कमजोरी

सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि अप्रैल 2016 से लेकर दिसंबर 2025 तक शराब से संबंधित लगभग दस लाख मामले दर्ज किए गए हैं तथा 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 2024 में 34.61 लाख लीटर, 2025 में 37.75 लाख लीटर और फरवरी 2026 तक 7.41 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई है. इन आंकड़ों से साफ है कि 2025 की तुलना में 2026 में शराब की बरामदगी में औसतन प्रतिमाह 18 फीसदी वृद्धि हुई है.

हाल ही में एलजेपी (आर) प्रमुख व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा था कि "शराबबंदी कानून में सुधार करने की जरूरत है. कानून के पीछे की सोच गलत नहीं है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई दिक्कतें हैं. इस कानून को पूरी तरह जमीन पर कैसे उतारा जाए, इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए. सीमावर्ती इलाकों से जिस तरह शराब की तस्करी हो रही है, उस पर भी सरकार को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है."

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एनडीए सरकार के प्रमुख घटक दल हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी शराबबंदी की मुखालफत करते रहे हैं. कुछ दिन पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री से शराबबंदी की समीक्षा कर उसके क्रियान्वयन में आ रही गड़बड़ी को दूर करने की अपील की है. वे कहते हैं, "मैं तो शुरू से ही कह रहा हूं कि शराबबंदी खराब नहीं है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी है. इसके चलते गरीब तबके के लोगों को दोहरा नुकसान हो रहा है. गरीब कानूनी पचड़े में फंस रहे हैं. बिहार सरकार को समीक्षा करके इस नीति पर फिर से विचार करना चाहिए."

नशे की सुई से बढ़ता एड्स फैसले का खतरा

एड्स कंट्रोल सोसाइटी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में एचआईवी के कुल 1.06 लाख मरीजों में से 11,836 लोग ऐसे हैं, जो नशे की सुई के कारण संक्रमित हुए हैं. दरअसल, सूखा नशा महंगा होने के कारण एक ही सिरिंज से कई लोग नशा करते हैं. अगर उनमें कोई एक भी एचआईवी संक्रमित हो तो कई और लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. एक संक्रमित ने बताया, "एविल और स्मैक को पहले लिक्विड बनाते हैं और फिर उसका इंजेक्शन बारी-बारी से कई लोग लेते हैं. साझा तौर पर इस्तेमाल करने के कारण वे एचआईवी पॉजिटिव हो जाते हैं. नशे की तलब में कुछ नहीं सूझता है."

इसका गोरखधंधा कितनी तेजी से फैल रहा, इसका अंदाजा पटना में फरवरी, 2026 से बीते 23 अप्रैल तक 60,000 से अधिक नशीले इंजेक्शन की बरामदगी तथा 15 लोगों की गिरफ्तारी से लगाया जा सकता है. इसी हफ्ते पटना पुलिस ने एक मकान में छापेमारी कर 1.28 करोड़ का कोडीन युक्त कफ सिरप और बुप्रेनोरफिन (इंजेक्शन) जब्त किया है. दस दिन पहले भी सवा करोड़ की खेप पकड़ी गई थी, जिसमें कोडीन युक्त कफ सिरप व बूप्रेनोरफिन के अलावा डाइजीपाम, पेंटाजोसिन इंजेक्शन और नाइट्रोजिपाम टैबलेट जैसी प्रतिबंधित दवाइयां थीं. रमेश गोस्वामी कहते हैं, "शराब नहीं मिलने के कारण सूखे नशे का इस्तेमाल बढ़ा. भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के इलाकों में किसी चीज को चिपकाने के लिए 10-15 रुपये में मिलने वाले सनफिक्स का उपयोग धड़ल्ले से नशे के लिए हो रहा है. यह कहने में गुरेज नहीं कि शराब और ड्रग्स, दोनों ही सरकार व समाज के लिए आफत बन चुके हैं."