नई दिल्ली, 1 मई: आज पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Workers’ Day) या 'मई दिवस' हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. प्रत्येक वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिवस समाज और देश की प्रगति में श्रमिकों के पसीने और उनके कड़े परिश्रम के प्रति सम्मान व आभार व्यक्त करने का अवसर है. अमेरिका, चीन और भारत समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इसे लेबर डे या मई दिवस जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इस अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है और लोग डिजिटल माध्यमों से शुभकामनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं.
मई दिवस का इतिहास 19वीं शताब्दी के अंत से जुड़ा हुआ है. आधिकारिक तौर पर पहली बार 1 मई 1889 को इस दिवस को मनाने की शुरुआत हुई थी. दरअसल, यह दिन मजदूरों के काम करने के घंटों (8 घंटे की शिफ्ट) को निर्धारित करने, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग के लिए किए गए लंबे संघर्ष का प्रतीक है. तब से लेकर आज तक, यह दिन श्रमिकों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा और उनकी आवाज बुलंद करने के एक मंच के रूप में कार्य करता है.
मई दिवस के इस खास मौके पर लोग इंटरनेट के माध्यम से एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं. व्हाट्सएप स्टेटस, एचडी इमेजेस, वॉलपेपर्स और जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए श्रमिकों के प्रति सम्मान प्रकट किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर ‘मई दिवस की शुभकामनाएं’ और ‘श्रमेव जयते’ जैसे संदेशों के साथ लोग देश के निर्माण में जुटे हर हाथ को नमन कर रहे हैं.





भारत में 1 मई की अहमियत सिर्फ श्रमिक दिवस तक ही सीमित नहीं है. आज ही के दिन देश के दो प्रमुख राज्य—महाराष्ट्र और गुजरात—अपना स्थापना दिवस (Statehood Day) भी मनाते हैं. साल 1960 में इसी दिन भाषाई आधार पर बॉम्बे स्टेट का विभाजन कर महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों का गठन किया गया था. इस कारण इन दोनों राज्यों में आज सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है और राजकीय स्तर पर कई समारोह आयोजित किए जाते हैं.
किसी भी देश की आर्थिक संरचना और बुनियादी ढांचे के निर्माण में मजदूरों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होता है. सड़कों, पुलों और ऊंची इमारतों से लेकर कारखानों के उत्पादन तक, हर जगह श्रमिकों का श्रम दिखाई देता है. मई दिवस का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को इन श्रमिकों के योगदान के प्रति जागरूक करना और समाज में उन्हें गरिमापूर्ण स्थान दिलाना है.













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