Mahashivratri 2026: मैसूर में मीट की बिक्री पर लगा प्रतिबंध, 15 फरवरी को बंद रहेंगी मांस की दुकानें और बूचड़खाने

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन (MCC) ने शहर भर में मांस की बिक्री और पशु वध पर रोक लगा दी है. 15 फरवरी को सभी बूचड़खाने और मीट स्टॉल बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

बेंगलुरु: महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के महापर्व को देखते हुए मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन (Mysuru City Corporation) (MCC) ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी किया है.  आगामी रविवार, 15 फरवरी 2026 को मैसूर शहर की सीमा के भीतर मांस की सभी दुकानों (Meat Stalls), मछली के स्टॉल (Fish Stall) और बूचड़खानों (Slaughterhouses) को बंद रखने का निर्देश दिया गया है. यह आदेश स्थानीय धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और त्योहार की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक वार्षिक अभ्यास के रूप में लागू किया गया है. यह भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग, जानें 15 फरवरी को शुभ मुहूर्त, निशिता काल और पूजा विधि

सभी रिटेल आउटलेट्स पर लागू होगा नियम

नगर निगम के आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध मटन, चिकन और मछली बेचने वाले सभी लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाले फुटकर विक्रेताओं पर समान रूप से लागू होग.  इसके अलावा, नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी बड़े बूचड़खानों में भी 24 घंटे तक पशु वध की अनुमति नहीं होगी.

MCC के स्वास्थ्य अधिकारी ने पुष्टि की कि इस दिन भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. निगम की प्रवर्तन टीमें (Enforcement Teams) बाजार में तैनात रहेंगी ताकि आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जा सके.

उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

नगर निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि रविवार को कोई भी दुकान खुली पाई जाती है, तो उसे तुरंत सील कर दिया जाएगा और वहां मौजूद सामान को जब्त कर लिया जाएगा. स्वास्थ्य निरीक्षक और स्थानीय पुलिस देवराज मार्केट और मंडी मोहल्ला जैसे प्रमुख मांस व्यापार केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर सकते हैं.

व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे वित्तीय नुकसान से बचने के लिए शनिवार शाम तक अपना स्टॉक खाली कर लें, क्योंकि रविवार तड़के से ही शटर गिराने के आदेश दिए गए हैं.

मैसूर में मीट बैन की परंपरा

मैसूर में महत्वपूर्ण धार्मिक और राष्ट्रीय पर्वों पर मांस की बिक्री को विनियमित करने का लंबा इतिहास रहा है. गणेश चतुर्थी, कृष्ण जन्माष्टमी, बुद्ध पूर्णिमा और सर्वोदय दिवस जैसे अवसरों पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं. अधिकांश स्थानीय व्यापारी संघों ने इस आदेश का स्वागत किया है और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया है.

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