Maharashtra Hindi Row: विपक्ष के विरोध के चलते थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का फैसला रद्द, उद्धव और राज ठाकरे ने सरकार पर साधा निशाना
महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति को लेकर बढ़ते विवाद के बीच राज्य सरकार ने विपक्ष के दबाव में आकर पुराना जीआर रद्द कर दिया है और नई समिति गठित की है। इस पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ने सरकार पर तीखा हमला बोला
Maharashtra Hindi Row: महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति (थ्री लैंग्वेज पॉलिसी) को लेकर बढ़ते विवाद के बीच, राज्य सरकार को विपक्ष के दबाव के चलते पीछे हटना पड़ा है. सरकार ने इस नीति से जुड़े पुराने जीआर (सरकारी आदेश) को रद्द कर नई समिति के गठन की घोषणा की है, जो इस पर दोबारा समीक्षा करेगी. इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला.
मराठी मानुष की एकता से झुकी सरकार
उद्धव ठाकरे ने कहा कि "सरकार को अंदाज़ा नहीं था कि मराठी मानुष इतनी मजबूती से एकजुट हो जाएगा। मराठी जनता की एकता के सामने सरकार को पीछे हटना पड़ा. यह भी पढ़े: Maharashtra Hindi Row: विपक्ष के दबाव में झुकी महाराष्ट्र सरकार, थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के फैसले रद्द; समीक्षा के लिए नई समिति का गठन
मुख्यमंत्री पर सवाल: "मराठी के खिलाफ क्यों?"
मीडिया से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने राज्य के मुख्यमंत्री पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा,
"मुख्यमंत्री मराठी के खिलाफ क्यों हैं? हिंदी को जबरन क्यों थोपा जा रहा है? क्या यह कहना गलत होगा कि मुख्यमंत्री मराठी भाषा के विरोध में हैं?"
असली मुद्दों पर सरकार क्यों मौन?
उद्धव ठाकरे ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार किसान, बेरोजगारी और महंगाई जैसे असल मुद्दों पर बात क्यों नहीं कर रही. उन्होंने कहा, "तीन भाषा नीति पर ज़बरन निर्णय लेना और मराठी को पीछे करना सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। लेकिन जनता जानना चाहती है कि असली समस्याओं पर सरकार क्यों मौन है.
यू-टर्न पर राज ने भी सरकार पर बोला हमला
सरकार के यू-टर्न पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई देर से आया विवेक नहीं, बल्कि मराठी जनमत के तीव्र विरोध का परिणाम है.
राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि हिंदी को थोपने के लिए सरकार इतना अडिग क्यों थी, और इस दबाव के पीछे कौन था — यह अभी भी रहस्य बना हुआ है.
समिति का रिपोर्ट आए या न आए, अब इस तरह की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह फैसला अब स्थायी माना जाना चाहिए. सरकार को चेतावनी दी जाती है कि यदि दोबारा ऐसा हुआ तो उस समिति को महाराष्ट्र में काम नहीं करने दिया जाएगा.
उद्धव और राज 5 जुलाई को निकालने जा रहे थे रैली
बताना चाहेंगे कि हिंदी के विरोध में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 5 जुलाई को मुंबई में एक रैली निकालने जा रहे थे. लेकिन रैली निकालने से पहले ही सरकार ने अपने फैसले को वापस ले लिया. जो दोनों भाइयों की जीत मानी जा रही हैं.
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सरकार ने किया यू-टर्न
दरअसल, राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह एक सरकारी आदेश (GR) जारी कर हिंदी भाषा को प्राथमिकता देने की मंशा जताई थी, जिसे लेकर राज्यभर में विरोध शुरू हो गया। विपक्ष, विशेषकर शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने सरकार पर मराठी भाषा और अस्मिता की अनदेखी का आरोप लगाया। बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने अब थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर अपने फैसले को रद्द कर दिया है और संतुलित नीति तैयार करने के लिए नई समिति का गठन किया गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 29, 2025 09:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

