Magh Purnima 2025: माघ पूर्णिमा को किस देवी-देवता की पूजा होती है? जानें माघी पूर्णिमा का महत्व, मुहूर्त, पूजा-विधि एवं धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्व!

 हर माह शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है. सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूरे प्रभाव में रहता हैइसलिए इस दिन को फूल मून भी कहा जाता है. मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन व्रतपूजा-अर्चना एवं दान धर्म आदि करने से जीवन के सभी कष्ट एवं पाप मिट जाते हैं. आइये जानते हैं माघ मास की पूर्णिमा के महत्वमुहूर्तपूजा विधि आदि के बारे में... 

माघी पूर्णिमा तिथि एवं मुहूर्त 

माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा प्रारंभः 06.56 PM से 11 फरवरी 2025, मंगलवार

माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा समाप्तः 07.22 PM से 12 फरवरी 2025, बुधवार

उदया तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा का स्नान और व्रत 12 फरवरी 2025 को रखा जाएगा.

माघ पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व 

 माघी पूर्णिमा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. पूर्णिमा के दौरान सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल अपेक्षाकृत अधिक होता हैजिस वजह से समुद्र में ऊंचे-ऊंचे ज्वार बनते हैं. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी खास माना गया है. यह समय तनमन और आत्मा के संतुलन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं. इस दिन माता लक्ष्मी और चंद्रमा की विशेष पूजा का विधान है. माघी पूर्णिमा ही नहीं हर माह पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि का भी विशेष महत्व होता है.

माघी पूर्णिमा का धार्मिक महत्व 

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन समस्त देवी-देवताओं ने मानव रूप धारण कर प्रयागराज स्थित गंगा-यमुना-सरस्वती की त्रिवेणी में स्नान किया था. इसलिए इस दिन अधिकांश श्रद्धालु त्रिवेणी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं. इस दिन बहुत से घरों में सत्यनारायण भगवान की कथा भी सुनी जाती है. इस दिन पितरों का तिल-तर्पण करने से उन्हें मोक्ष मिलती है.

माघ पूर्णिमा व्रत पूजा विधि

 माघ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व उठें. किसी पवित्र नदी या कुएं के जल से स्नान करें. अगर कुआं या नदी सुलभ नहीं हो तो घर में सामान्य पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर उससे स्नान करने से भी गंगा-स्नान वाला पुण्य अर्जित किया जा सकता है. इसके बाद सूर्य-मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करें. व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. इसके पश्चात श्रीहरि एवं देवी लक्ष्मी की पूजा एवं आरती करें. इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विधान है. इसके पश्चात गरीब एवं ब्राह्मण को भोजन खिलाकर दक्षिणा दें. ऐसा करने से मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होता है.