Lavasa Project: लवासा प्रोजेक्ट मामले में पवार परिवार को बड़ी राहत मिली है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने लवासा हिल टाउनशिप प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, उनकी बेटी और बारामती सांसद सुप्रिया सुले, तथा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के खिलाफ CBI जांच की मांग वाली आपराधिक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल यह जानने के लिए कि अपराध हुआ है या नहीं, किसी भी मामले में जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता.
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कोर्ट ने कहा 'सिर्फ शक के आधार पर नहीं होगी जांच'
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंकगड की खंडपीठ ने कहा कि जांच केवल उन्हीं मामलों में हो सकती है जहाँ पहचान योग्य आरोपी या संदिग्ध अपराध मौजूद हों. "रोविंग या फिशिंग इनक्वायरी" यानी बिना ठोस आधार के व्यापक जांच की अनुमति कानून नहीं देता. यह भी पढ़े: Gautam Navlakha Gets Bail: बॉम्बे हाईकोर्ट से गौतम नवलखा को बड़ी राहत, एल्गर परिषद-माओवादी संबंध मामले में मिली जमानत
2022 में PIL पहले ही खारिज हो चुकी है
अदालत ने बताया कि भूमि आवंटन, विशेष अनुमति और छूटों से जुड़ी यही शिकायतें याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक अन्य PIL में पहले उठाई जा चुकी थीं, जिसे फरवरी 2022 में खारिज कर दिया गया था। इसलिए इन मुद्दों को फिर से नहीं खोला जा सकता.
पवार परिवार के खिलाफ जांच की कोई गुंजाइश नहीं
पीठ ने कहा कि ऐसे में शरद पवार, अजीत पवार और सुप्रिया सुले जैसी व्यक्तियों के खिलाफ किसी भी तरह की जांच शुरू करने का आधार नहीं बनता.
याचिकाकर्ता की देरी पर भी कोर्ट सख्त
याचिकाकर्ता नानासाहेब जाधव ने 2018 में पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन लगभग छह वर्षों तक कोई कार्रवाई न करने पर अदालत ने उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए और कहा कि वे पहले लंबित PIL में भी राहत मांग सकते थे.
लवासा प्रोजेक्ट अब बना ‘घोस्ट सिटी’
अदालत ने यह भी कहा कि 25 साल पहले शुरू हुआ लवासा प्रोजेक्ट अब विफल हो चुका है और कई कानूनी व दिवालियापन प्रक्रियाओं में उलझा हुआ एक “घोस्ट सिटी” बन गया है।













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