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सुलग उठा लद्दाख: हिंसा के मामले में कांग्रेस नेता पर FIR, सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगाया भड़काने का आरोप

लद्दाख में पूर्ण राज्य की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 90 घायल हो गए. इस हिंसा और आगजनी के मामले में कांग्रेस के एक स्थानीय काउंसलर पर FIR दर्ज की गई है. केंद्र सरकार ने हिंसा भड़काने के लिए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भाषणों को जिम्मेदार ठहराया है.

सुलग उठा लद्दाख: हिंसा के मामले में कांग्रेस नेता पर FIR, सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगाया भड़काने का आरोप
(Photo Credit: X)

लद्दाख में कल हुई ज़बरदस्त हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस हिंसा में कम से कम चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 90 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. इस मामले में अब कांग्रेस के काउंसलर फुंटसोग स्टैनज़िन त्सेपग के खिलाफ़ केस दर्ज किया गया है. वहीं, केंद्र सरकार ने इस पूरी हिंसा के लिए मशहूर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के "भड़काऊ भाषणों" को ज़िम्मेदार ठहराया है.

हिंसा के बाद लेह ज़िले में कर्फ्यू लगा दिया गया है और शांति बनाए रखने के लिए CRPF और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को भी तैनात किया गया है.

बीजेपी का कांग्रेस पर सीधा आरोप

कल जब गुस्साई भीड़ ने लद्दाख में बीजेपी दफ़्तर और लद्दाख हिल काउंसिल सचिवालय में आग लगा दी, तो बीजेपी ने इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को दोषी ठहराया. बीजेपी ने कुछ तस्वीरें भी जारी कीं, जिनमें दावा किया गया कि कांग्रेस काउंसलर त्सेपग हिंसक भीड़ का हिस्सा थे. लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने इसे एक साज़िश बताया और कहा कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इसके तुरंत बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर कांग्रेस काउंसलर का नाम भी शामिल कर लिया.

सरकार के निशाने पर सोनम वांगचुक

गृह मंत्रालय ने साफ़ कहा है कि सोनम वांगचुक ने अपने भाषणों से भीड़ को उकसाया. वांगचुक पिछले 15 दिनों से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे. हालांकि, जैसे ही लेह में हिंसा भड़की, उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी.

सरकार का कहना है कि वांगचुक ने लोगों को भड़काने के लिए नेपाल में हुए हालिया 'जेन Z' विरोध और 'अरब स्प्रिंग' जैसे आंदोलनों का ज़िक्र किया. मंत्रालय के बयान के मुताबिक, "वांगचुक के भड़काऊ भाषणों से प्रेरित होकर भीड़ भूख हड़ताल वाली जगह से निकली और एक राजनीतिक पार्टी के दफ़्तर और सरकारी दफ़्तर पर हमला कर दिया."

क्यों हो रहा है लद्दाख में विरोध प्रदर्शन?

पिछले तीन सालों से लद्दाख में केंद्र के सीधे शासन के खिलाफ़ असंतोष बढ़ रहा है. वहां के निवासी अपनी ज़मीन, संस्कृति और संसाधनों को बचाने के लिए लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

आपको बता दें कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर से अलग कर लद्दाख को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. उस समय सोनम वांगचुक समेत लेह के कई लोगों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया था. लेकिन एक साल के अंदर ही लोगों को लगने लगा कि उपराज्यपाल के शासन में उनकी कोई राजनीतिक सुनवाई नहीं हो रही है.

इसी नाराज़गी के कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और भूख हड़तालें शुरू हुईं. पहली बार बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल के राजनीतिक और धार्मिक समूह एक साथ मिलकर अपनी मांगों के लिए लड़ रहे हैं.

केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इस साल मार्च में जब लद्दाखी नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की, तो वह बातचीत भी विफल हो गई. स्थानीय नेताओं का कहना है कि गृह मंत्री ने उनकी मुख्य मांगों को मानने से इनकार कर दिया. एक नेता ने तो यहां तक दावा किया कि गृह मंत्री ने बैठक में कहा कि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाना एक "गलती" थी.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 25, 2025 08:47 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).