Kolkata Shocker: गणित का पेपर खराब होने के तनाव में छात्रा ने दी जान, माध्यमिक परीक्षा के बाद उठाया आत्मघाती कदम

कोलकाता के टॉप्सिया इलाके में एक नाबालिग छात्रा ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों के अनुसार, छात्रा माध्यमिक परीक्षा में गणित का पेपर अच्छा न होने के कारण मानसिक तनाव में थी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Photo)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता (Kolkata) से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां माध्यमिक (10वीं) की परीक्षा दे रही एक छात्रा (Student) ने परीक्षा के तनाव में आकर आत्महत्या (Suicide) कर ली. कोलकाता पुलिस (Kolkata Police) ने शनिवार को बताया कि छात्रा का शव गुरुवार रात उसके घर से बरामद किया गया. प्राथमिक जांच के अनुसार, छात्रा इस बात से बेहद परेशान थी कि उसका गणित का पेपर (Maths Paper) उम्मीद के मुताबिक नहीं गया था. यह भी पढ़ें: Mathura Horror: एक ही परिवार के 5 सदस्यों के मिले शव, दूध में जहर मिलाकर सामूहिक खुदकुशी की आशंका

परीक्षा के बाद अवसाद में थी छात्रा

मृतक छात्रा के परिजनों ने पुलिस को बताया कि माध्यमिक परीक्षाएं 12 फरवरी को समाप्त हुई थीं. छात्रा के बाकी सभी विषयों के पेपर अच्छे हुए थे, लेकिन गुरुवार को हुए गणित के पेपर के बाद से ही वह गहरे तनाव (Depression) में थी. वह बार-बार इसी बात को लेकर चिंता जता रही थी कि गणित में उसके अंक कम आएंगे.

घर में ही लगाया मौत को गले

पुलिस के अनुसार, यह घटना टॉप्सिया थाना क्षेत्र के महेंद्र रॉय लेन स्थित एक बहुमंजिला इमारत की है. गुरुवार रात जब यह घटना हुई, तब छात्रा के माता-पिता घर पर नहीं थे, जबकि उसकी बहन और दादी दूसरे कमरे में थे.

अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत

परिजनों ने आनन-फानन में छात्रा को फंदे से उतारा और नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले गए। हालांकि, वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस ने फिलहाल अप्राकृतिक मृत्यु (Unnatural Death) का मामला दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. यह भी पढ़ें: 'Jeeja Saali' Suicide in Hardoi: हरदोई में 'जीजा-साली' ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, प्रेम संबंधों का था मामला, लखनऊ-दिल्ली रेल मार्ग पर हुई घटना

बोर्ड परीक्षाओं के दौरान मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा

यह घटना एक बार फिर बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव और उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के परिणामों को लेकर बच्चों में होने वाला डर जानलेवा साबित हो सकता है.

अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे परीक्षाओं के दौरान बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें और उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि एक पेपर खराब होना जीवन का अंत नहीं है.

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