बिना जांच कॉल डिटेल रिकॉर्ड नहीं ले सकती पुलिस, प्राइवेसी पर कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) उसकी निजी जानकारी होती है, जिसे पुलिस बिना जरूरी जांच के नहीं मांग सकती. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर पुलिस को बिना कानूनी जांच के CDR हासिल करने की छूट दी गई, तो यह देश को 'पुलिस स्टेट' बना देगा.

यह टिप्पणी जस्टिस सूरज गोविंदराज ने उस वक्त की, जब एक महिला की कॉल डिटेल गैरकानूनी तरीके से हासिल करने के आरोप में बयटरायनपुरा थाने की सब-इंस्पेक्टर विद्या वी.एम. के खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई हो रही थी.

क्या है मामला?

एक महिला ने शिकायत की थी कि पुलिस अधिकारी विद्या वी.एम. और अन्य लोगों ने मिलकर उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स को गैरकानूनी तरीके से हासिल किया और उन्हें उन लोगों के साथ साझा किया जिनके खिलाफ उसने खुद ही एक आपराधिक केस दर्ज कराया था. महिला का आरोप है कि इन कॉल डिटेल्स का गलत इस्तेमाल कर उसे परेशान किया गया.

इस शिकायत पर दिसंबर 2024 में निचली अदालत ने विद्या और अन्य आरोपियों को समन भेजा था. इसके बाद विद्या ने हाईकोर्ट का रुख किया और केस खत्म करने की अपील की.

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

हाईकोर्ट ने विद्या की याचिका को खारिज करते हुए कहा, "किसी भी व्यक्ति की कॉल डिटेल सिर्फ तभी हासिल की जा सकती है, जब कोई वैधानिक और जरूरी जांच चल रही हो. इसके अलावा ऐसा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है."

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित 'पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार' फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, और इसे बिना ठोस कारण के भंग नहीं किया जा सकता.

किन धाराओं में मामला दर्ज है?

विद्या और अन्य आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज है:

  • धारा 354(D) – पीछा करना (Stalking)
  • धारा 409 – आपराधिक विश्वासघात
  • धारा 506 – आपराधिक धमकी
  • धारा 509 – महिला की मर्यादा भंग करने वाले शब्द या इशारे
  • इसके साथ ही आईटी एक्ट 2000 की धाराएं:
  • धारा 66(D) – कंप्यूटर संसाधन से धोखाधड़ी
  • धारा 66(E) – निजता का उल्लंघन

हाईकोर्ट का यह फैसला एक अहम मिसाल पेश करता है कि किसी की भी निजी जानकारी, जैसे कि कॉल डिटेल्स, को बिना कानूनी जरूरत के हासिल करना संविधान द्वारा दिए गए निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है. यह फैसला न केवल पुलिस व्यवस्था को अनुशासित करने का काम करेगा, बल्कि आम नागरिकों की निजता की रक्षा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है.